अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने प्रभास पाटन स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के नीचे बौद्ध गुफाएं और ऐतिहासिक अवशेष होने का दावा करने वाली पुनर्याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायाधीश डी. एन. रे की पीठ ने बिना किसी ठोस आधार के दायर की गई इस याचिका पर सुनवाई करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता रत्ना वोरा ने दलील दी कि आईआईटी गांधीनगर (IIT Gandhinagar) द्वारा वर्ष 2017 में किए गए एक सर्वे में सोमनाथ मंदिर के नीचे बौद्ध गुफाओं और अवशेषों के प्रमाण मिले थे।

हालांकि, जब खंडपीठ ने इस दावे के समर्थन में ठोस व आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, तो याचिकाकर्ता कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकीं। अधिवक्ता वोरा ने तर्क दिया कि उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत इस सर्वे की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन इसे सोमनाथ ट्रस्ट की निजी संपत्ति बताते हुए जानकारी देने से मना कर दिया गया।

इस पर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट्स या काल्पनिक अवधारणाओं के आधार पर इस तरह के अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप (Judicial Intervention) नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के वकील को पेश करने की मांग भी खारिज

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मामले में पैरवी के लिए उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश नरवड़े उपस्थित होंगे, इसलिए समय दिया जाए। हालांकि, पीठ ने इस आग्रह को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि केवल किसी वरिष्ठ वकील की उपलब्धता के आधार पर बिना आधार वाली याचिका पर केस को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

राज्य सरकार ने बताया ‘पब्लिसिटी स्टंट’

राज्य सरकार की ओर से इस याचिका का कड़ा विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने इसे केवल प्रचार और ‘पब्लिसिटी’ हासिल करने के इरादे से दायर की गई याचिका करार दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले जून 2026 में डॉ. विलास तुकाराम खरात द्वारा दायर मूल याचिका को गुजरात हाईकोर्ट ने भ्रामक और जनहित याचिका (PIL) के तंत्र का दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया था। उस समय अदालत ने याचिकाकर्ता पर 2 लाख का जुर्माना भी लगाया था। इसी फैसले के खिलाफ एडवोकेट रत्ना वोरा ने यह पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे अब अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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