जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में सोमवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दुनिया के तीसरे सबसे ऊंचे रोपवे गुलमर्ग गोंडोला में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। दोपहर करीब 2:30 बजे गोंडोला के सभी केबिन बीच हवा में रुक गए, जिनमें 300 से अधिक पर्यटक सवार थे। सेना के अधिकारियों के अनुसार, कुल 65 केबिन हवा में फंसे रहे। हर केबिन में अधिकतम 6 लोगों के बैठने की क्षमता है। घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान तुरंत शुरू किया गया। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, SDRF और NDRF की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं।

शाम 7 बजे तक 151 लोगों को रस्सियों और सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि 25 केबिनों में अब भी पर्यटक फंसे हुए हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी यात्रियों को सुरक्षित निकालने में अभी कुछ और घंटे लग सकते हैं। राहत की बात यह है कि अब तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है। गुलमर्ग गोंडोला दो चरणों में संचालित होता है। पहला चरण गुलमर्ग को कोंगडोरी से जोड़ता है, जबकि दूसरा चरण कोंगडोरी से अफरवात स्टेशन तक जाता है। दोनों रूट्स पर कुल 108 केबिन संचालित होते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, गोंडोला में रविवार को भी तकनीकी दिक्कत सामने आई थी। मरम्मत के बाद सेवा दोबारा शुरू की गई, लेकिन 24 घंटे के भीतर दूसरी बार खराबी आने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 25 जून 2017 को भी गुलमर्ग गोंडोला में बड़ा हादसा हुआ था। तेज आंधी के दौरान एक पेड़ केबल लाइन पर गिर गया था, जिससे एक केबिन बुरी तरह झूलने लगा और उसके शीशे टूट गए। करीब 100 फीट नीचे गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी।

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