कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। ग्वालियर में गजरा मेडिकल कॉलेज के कमलाराजा अस्पताल यानी KRH में एक बार फिर जर्जर बिल्डिंग के चलते बड़ा हादसा होते होते टल गया। अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। प्लास्टर पलंग नंबर-19 पर गिरा, जहां दो महीने की मासूम बच्ची भर्ती थी। कुछ टुकड़े बच्ची को लगे, लेकिन गनीमत रही कि उसकी जान बाल बाल बच गई। हादसे के बाद वार्ड में भर्ती 16 बच्चों को तत्काल दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा। लेकिन यह सिर्फ एक वार्ड में प्लास्टर गिरने की घटना नहीं है। 74 साल पुरानी अस्पताल की बिल्डिंग में पिछले ढाई साल में 8 हादसे हो चुके हैं और अकेले 2026 में तीन बार प्लास्टर गिर चुका है। मरम्मत के लिए शासन को 11 प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हुई।
दरअसल, ग्वालियर चम्बल अंचल का जयारोग्य अस्पताल समूह बड़े बड़ा हॉस्पिटल है। जहां अंचल के साथ ही उत्तप्रदेश और राजस्थान सभी मरीज आते है। इसी के कमलाराजा अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड नंबर-3 में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक छत का प्लास्टर टूटकर नीचे आ गिरा। पलंग नंबर-19 पर दो महीने की मासूम बच्ची भर्ती थी। प्लास्टर के हल्के टुकड़े बच्ची तक पहुंचे। बच्ची के कान में प्लास्टर का मलबा भर गया। गनीमत रही कि बच्ची की जान बच गई, लेकिन घटना ने अस्पताल की बिल्डिंग की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। हादसे के बाद एहतियातन पूरा वार्ड खाली कराया गया। जहां भर्ती 16 बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया। यानी जिस जगह बीमार बच्चों का इलाज और देखभाल होनी चाहिए, उसी जगह छत से गिरता मलबा उनके लिए खतरा बन गया।
74 साल पुरानी है बिल्डिंग
कमलाराजा अस्पताल की मौजूदा बिल्डिंग करीब 74 साल पुरानी है। लंबे समय से इसकी मरम्मत और रखरखाव की जरूरत सामने आती रही है। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से बीते चार साल में बिल्डिंग की मरम्मत और पुरानी वायरिंग बदलने के लिए शासन को 11 प्रस्ताव भेजे गए हैं। लेकिन प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद अब तक उन पर अमल नहीं हुआ। इसी बीच हादसों का आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है।
2024 से अभी तक 08 हादसे
साल 2024 से अब तक अस्पताल में 8 हादसे हो चुके हैं। इनमें छत और प्लास्टर से जुड़ी घटनाएं भी सामने आती रही हैं। साल 2026 में ही तीन बार प्लास्टर गिर चुका है। ऐसे में चिल्ड्रन वार्ड में हुआ हादसा एक चेतावनी की तरह है। अगर समय रहते जर्जर हिस्सों की मरम्मत नहीं हुई तो अगली बार गिरने वाला मलबा सिर्फ हल्की चोट तक सीमित रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं।
प्रस्ताव पर नहीं हुआ कोई अमल
खास चिंता उन वार्डों को लेकर है जहां छोटे बच्चे, मरीज और उनके परिजन लगातार मौजूद रहते हैं। जर्जर छत, पुरानी वायरिंग और बार-बार सामने आ रही प्लास्टर गिरने की घटनाएं किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा रही हैं। अब सवाल ये है कि 11 प्रस्तावों पर कार्रवाई के लिए क्या एक और हादसे का इंतजार किया जाएगा? या फिर मासूमों और मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए 74 साल पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत पर तत्काल फैसला होगा?
कमलाराजा अस्पताल में हुआ हादसा भले ही बड़ी जनहानि के बिना टल गया, लेकिन इसने अस्पताल की जर्जर व्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी जरूर दे दी है। अब जिम्मेदारी सिर्फ हादसे के बाद वार्ड खाली कराने की नहीं, बल्कि ऐसे संभावित हादसों को रोकने की भी है।
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