कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर की सड़कों की बदहाली अब हाईकोर्ट की निगरानी में जांची जाएगी। शहर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका पर लगातार दो दिन चली सुनवाई में हाईकोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने सवाल किया कि शहर में सड़कें आखिर कितनी चलने लायक हैं और क्या नगर निगम ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की सही जांच की है? अब एडवोकेट कमिश्नर और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर जाकर सड़कों की खुदाई कर सैंपल लेगी और वैज्ञानिक तरीके से गुणवत्ता की जांच करेगी।
ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में ग्वालियर शहर की जर्जर और खस्ताहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। लगातार दो दिन चली सुनवाई के दौरान नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय समेत जिम्मेदार अधिकारी कोर्ट में मौजूद रहे। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने नगर निगम से पूछा था कि शहर में कुल कितनी सड़कें हैं और इनमें से कितनी सड़कें चलने लायक हैं। निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शहर में कुल 129 सड़कें हैं, जिनमें से सिर्फ 62 सड़कें चलने लायक हैं, जबकि 24 सड़कें पूरी तरह बेकार और जर्जर स्थिति में हैं।
सड़कों की हालत और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर हाईकोर्ट ने अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। कोर्ट के निर्देश पर एडवोकेट,कमिश्नर और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बनाई जाएगी। यह टीम मौके पर जाकर सड़कों की खुदाई करेगी,निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के सैंपल लेगी और उनकी वैज्ञानिक जांच कराएगी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सड़क निर्माण में हुई कथित गड़बड़ियों और अदालत को गुमराह करने की कोशिश पर भी कड़ा ऐतराज जताया। नगर निगम को सड़क निर्माण से जुड़े पांच अहम बिंदुओं पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने सड़कों के निर्माण पर खर्च की गई राशि और उनकी माप पुस्तिकाओं यानी Measurement Books से जुड़े सभी मूल दस्तावेज भी पेश करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान शहर की चर्चित ‘सुरंग वाली सड़क’ का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम कमिश्नर से सवाल किया कि आखिर शहर में इस तरह की सड़क कैसे बन गई। कोर्ट ने यह भी पूछा कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी और जांच किस स्तर पर की गई। अब एडवोकेट कमिश्नर और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम सड़कों की वास्तविक स्थिति और निर्माण की गुणवत्ता की जांच करेगी। जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कार्रवाई हो सकती है।मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
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