कुंदन कुमार, पटना। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री संजय कुमार सिंह ने आज बुधवार (27 मई) को सूचना भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ‘हर घर नल का जल’ योजना का पूरा लेखा-जोखा मीडिया के सामने रखा।
मंत्री ने बताया कि साल 2016 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब बिहार के सिर्फ 2 लाख 66 हजार परिवारों तक नल का जल पहुंचता था और आज 2026 में यह संख्या बढ़कर 1 करोड़ 87 लाख से भी ज्यादा हो गई है। विभाग का लक्ष्य कुल 2 करोड़ 2 लाख परिवारों तक यह सुविधा पहुंचाना है।

1 लाख ले अधिक वॉर्डों में चल रही जलपूर्ति योजनाएं

मंत्री संजय कुमार सिंह ने बताया कि, राज्य में अभी कुल 1 लाख 14 हजार 450 वॉर्डों में जलापूर्ति योजनाएं चल रही हैं, जिनमें लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की 50 हजार से ज्यादा और पंचायती राज विभाग से हस्तांतरित 70 हजार से अधिक योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि, जिन इलाकों में भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की मात्रा खतरनाक स्तर पर है। वहां गंगा, सोन और सुरसर नदी को स्रोत बनाकर बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं बनाई गई हैं। भागलपुर, वैशाली, बक्सर, बेगूसराय, भोजपुर, नवादा और नालंदा समेत कई जिलों में इन योजनाओं से लाखों लोगों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है। सुपौल, कैमूर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर सहित कई और जिलों के लिए नई बहुग्रामीण योजनाओं का प्रस्ताव भारत सरकार को जल जीवन मिशन के तहत भेजा जा चुका है।

10 महीने में आईं 1.5 लाख से अधिक शिकायतें

उन्होंने बताया कि, जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए विभाग ने राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय और अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनाया है। एक NABL मान्यता प्राप्त रेफरल लैब, 38 जिला स्तरीय और 75 अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं। शिकायत निवारण की बात करें तो अगस्त 2025 से मई 2026 के बीच CGRC में 1 लाख 54 हज़ार से अधिक शिकायतें आईं, जिनमें से 1 लाख 46 हज़ार से ज़्यादा का समाधान किया जा चुका है। मंत्री ने बताया कि गर्मी के मौसम को देखते हुए विभाग ने Heat Wave Plan भी तैयार किया है। राज्य में 475 वाटर टैंकर, 15 वाटर ATM और 15 जलदूत तैनात हैं।

रोजगार का भी माध्यम बना योजना

मंत्री संजय कुमार सिंह ने बताया कि, योजना का सामाजिक असर भी दिख रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं पंप ऑपरेटर और अनुरक्षक के रूप में काम कर रही हैं। 1 लाख 20 हज़ार से अधिक पंप ऑपरेटर और अनुरक्षक कार्यरत हैं। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025 के मुताबिक डायरिया, टाइफाइड और वायरल हेपेटाइटिस के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।

आगे की योजनाओं की बात करते हुए उन्होंने बताया कि, 2026-27 में विभाग का लक्ष्य है। छूटे हुए महादलित टोलों तक अगले 3 महीने में पानी पहुंचाना, 100 नए Water ATM लगाना, IoT आधारित Real Time मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना और 50 फीट से अधिक गहरे भूजल वाले इलाकों में सतही जल पाइपलाइन के जरिए पानी देना विभाग का लक्ष्य है।

हालांकि सवाल यह भी उठता है कि जब 1 लाख 54 हजार शिकायतें एक साल से कम समय में आ रही हों…तो क्या सिर्फ नल लगाना काफी है? पानी की गुणवत्ता और निरंतरता की असल परीक्षा तो गांवों में जाकर होगी।

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