देहरादून. देश में इन दिनों वंदे मातरम् को लेकर बहस छीड़ी हुई है. लोगों की जुबान से ज्यादा वंदे मातरम् का जिक्र राजनीतिक गलियारों में ज्यादा हो रहा है. इस बीच वंदे मातरम् को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. रावत ने कहा है कि GEN G के मुद्दों से भटकाने के लिए वंदे मातरम् की चर्चा की जा रही है. रावत ने एक्स पर लिखा है कि ‘भाजपा ने GEN G के आंदोलन से उठे हुए सवालों और देश के समक्ष जो गंभीर प्रश्न हैं, उनसे ध्यान भटकाने के लिए वंदे मातरम् की चर्चा प्रारंभ की, उसको लेकर वह संसद में भी आए.’
‘हमारी दिक्कत यह है कि हम आजादी की लड़ाई के मूल्यों, मान्यताओं और सिद्धांतों से अलग नहीं हट सकते. वंदे मातरम् हमारे आजादी के संघर्ष का गीत था और कांग्रेस वर्किंग कमेटी में 1937 में, जिसमें सारे स्वतंत्रता सेनानी थे, महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में यह तय किया गया कि एक सब-कमेटी बनाई जाए, जिसमें सुभाष बोस, आचार्य नरेंद्र देव, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद और दूसरे लोग थे. उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर का मार्गदर्शन लेकर गीत तय किया. उन्होंने जो तय किया, उसी को आजादी से पहले, अंग्रेजों से लड़ते समय भी कांग्रेस के लोग गाते थे और जब आजादी के बाद कोई भी हमारा कार्यक्रम होता है, पार्टी का, उस कार्यक्रम में हम वंदे मातरम् के साथ ही प्रारंभ करते हैं.’
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रावत ने आगे लिखा कि ‘वंदे मातरम् से हमारा ऐतिहासिक रिश्ता है, हमारा ऐतिहासिक नाता है. यह तो बीच में भाजपा वंदे मातरम् की डकैती कर रही है. इनको यह लग रहा है कि जितना मिल जाए, चाहे उसके लिए समाज को बांटना ही क्यों न पड़े, कुछ हमको भी उसमें हिस्सा मिलना चाहिए. वंदे मातरम् से ऐतिहासिकता के साथ भाजपा का कोई रिश्ता नहीं है. वो कहीं कोई प्रस्ताव पारित करें, उनका अपना संगठन है, वो प्रस्ताव पारित करें. लेकिन जो वास्तविकता है, हम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के द्वारा जो निर्धारित मूल्य-मान्यताएँ हैं और उस समय की वर्किंग कमेटी ने जो तय किया है, उससे आगे आज की वर्किंग कमेटी नहीं बढ़ सकती है.’

