अजय सैनी, भिवानी। हनुमान ढाणी स्थित प्रसिद्ध हनुमान जोहड़ी धाम के स्वामी विवेकानंद सभागार में शुक्रवार से तीन दिवसीय चतुर्थ हरियाली तीज मेला महोत्सव-2026 का आगाज हुआ। युवा जागृति एवं जन कल्याण मिशन ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिवारिक महोत्सव का आयोजन धाम के महंत बालयोगी चरणदास महाराज के सानिध्य में किया जा रहा है। पहले दिन श्रद्धालुओं, महिलाओं और बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।
तृप्ति श्योराण ने किया महोत्सव का उद्घाटन
महोत्सव के पहले दिन प्रात:कालीन सत्र का उद्घाटन हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऋतु अमित गोयल ने की। वरिष्ठ अधिवक्ता युधिष्ठिर वत्स अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
वहीं, सायंकालीन सत्र में विधायक घनश्याम सर्राफ मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर परिषद की चेयरपर्सन प्रीति भवानी प्रताप ने की। पूर्व पार्षद नरेंद्र सर्राफ अति विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंच संचालन राजकुमार सैनी, दिनेश दाधीच और छवि कितलाना ने किया।
युवाओं को संस्कारों और संस्कृति से जोड़ने पर जोर
तृप्ति श्योराण ने कहा कि हरियाली तीज जैसे सांस्कृतिक और पारंपरिक महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों में रचनात्मकता और कला के प्रति रुचि बढ़ती है। साथ ही उन्हें लोक संस्कृति को करीब से जानने और सीखने का अवसर मिलता है।
विधायक घनश्याम सर्राफ ने कहा कि आधुनिकता के दौर में विलुप्त होती परंपराओं को जीवित रखने और सहेजने के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है। उन्होंने महंत बालयोगी चरणदास महाराज और आयोजन समिति को महोत्सव के लिए बधाई दी।
लोक संस्कृति और सनातन परंपराओं का संरक्षण मुख्य उद्देश्य
महोत्सव के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए महंत बालयोगी चरणदास महाराज ने कहा कि आयोजन का मुख्य ध्येय समृद्ध लोक संस्कृति, सनातन परंपराओं और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि हरियाणवी लोक संस्कृति को संजोना, मातृशक्ति को सशक्त मंच देना और नई पीढ़ी व युवाओं को अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ना महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य है।
मेहंदी से लेकर राखी बनाओ तक प्रतियोगिताएं
तीन दिवसीय मेले में बच्चों, महिलाओं और परिवारों के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इनमें मेहंदी, चित्रकला, केश सज्जा, पारंपरिक परिधान प्रदर्शन, राखी बनाओ, कबाड़ से जुगाड़ और बिना अग्नि के खाना बनाओ जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
वरिष्ठ मातृशक्ति द्वारा प्रस्तुत हरियाणवी लोकगीतों ने भी मेले में पारंपरिक रंग भर दिया। परिसर में विशेष झूले और व्यंजनों की स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
लकी ड्रॉ में हर दिन मिलेंगे चांदी के सिक्के
महोत्सव में लकी ड्रॉ भी रखा गया है। पहले दिन शुद्ध चांदी का एक सिक्का दिया गया। दूसरे दिन चांदी के दो सिक्के और तीसरे दिन चांदी के तीन सिक्के प्रदान किए जाएंगे।
बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले सभी बाल कलाकारों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है।
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