हरियाणा सरकार ने कृषि विपणन बोर्ड की 10 प्रमुख सेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में शामिल किया है। इसके तहत किसानों और आम नागरिकों के काम अब 15 से 60 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूरे किए जाएंगे।

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की 10 महत्वपूर्ण सेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम (राइट टू सर्विस एक्ट) के तहत अधिसूचित कर दिया है। इस नए आदेश के लागू होने के बाद अब अनाज मंडियों में अपनी फसल बेचने वाले किसानों को महज 24 घंटे यानी एक दिन के भीतर जे-फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य कृषि से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है ताकि किसानों को अपनी ही उपज का हिसाब पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

नए नियमों से किसानों को बड़े फायदे

इस अधिसूचना के अंतर्गत कृषि कार्यों के दौरान किसी हादसे में चोट लगने या मृत्यु होने पर मिलने वाली अनुग्रह राशि की प्रक्रिया को भी बेहद आसान और समयबद्ध बना दिया गया है। नई व्यवस्था के मुताबिक अब विसरा रिपोर्ट प्राप्त होने के एक महीने के भीतर पीड़ित किसान के आश्रितों को वित्तीय सहायता या अनुग्रह राशि अनिवार्य रूप से जारी कर दी जाएगी। इसके साथ ही मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी भी सख्त कर दी गई है। अगर किसी सार्वजनिक शौचालय में साफ-सफाई दुरुस्त नहीं पाई जाती है, तो उसकी शिकायत मिलने के मात्र दो दिन के भीतर व्यवस्था को पूरी तरह ठीक करना होगा।

संपत्ति अंतरण के लिए समय सीमा तय

बोर्ड से जुड़ी संपत्तियों के मामलों को निपटाने के लिए भी बेहद कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब हस्तांतरण विलेख जारी करने, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), आवंटन प्रतिलिपि और पुन: आवंटन जारी करने जैसे काम अधिकतम 30 दिनों के भीतर पूरे किए जाएंगे। इसके अलावा बेबाकी प्रमाणपत्र और गिरवी के लिए जरूरी एनओसी केवल 15 दिनों में जारी करनी होगी। विक्रय के सामान्य मामलों में संपत्ति का पुन: अंतरण 30 दिनों में होगा, जबकि अविवादित मृत्यु के कारण संपत्ति के पुन: अंतरण के मामलों को सुलझाने के लिए अधिकतम 60 दिनों का समय निर्धारित किया गया है।