चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू हो रहा है। सत्र की अवधि भले ही कम रखी गई है, लेकिन विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए कई बड़े मुद्दे तैयार किए हैं। बेरोजगारी, हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN), कानून-व्यवस्था, कर्मचारियों की मांगें, सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, नशे की समस्या और शिक्षा व्यवस्था जैसे विषयों पर सदन में तीखी बहस होने के आसार हैं। दूसरी ओर, सरकार ने भी विपक्ष के संभावित सवालों का जवाब देने के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई अहम बैठक
सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। इसमें सदन में उठने वाले प्रमुख मुद्दों और विपक्ष की रणनीति पर चर्चा की गई। विधायकों को सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाबों और विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की जानकारी भी साझा की गई।
बैठक के बाद विधायकों के साथ डिनर के दौरान भी सत्र की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। सत्तापक्ष की कोशिश है कि सीमित समय में जरूरी विधायी काम पूरे किए जाएं और विपक्ष के सवालों का तथ्यों के साथ जवाब दिया जाए।
पहले दिन शोक प्रस्ताव और प्रश्नकाल
विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी। पहले दिन की शुरुआत शोक प्रस्तावों से होगी। इसके बाद प्रश्नकाल में विधायक अलग-अलग विभागों से जुड़े सवाल सरकार के सामने रखेंगे।
सदन के कामकाज को लेकर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में भी चर्चा हो चुकी है। सीमित अवधि को देखते हुए विधायी कार्यों को तय समय में पूरा करने की योजना है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहले ही सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा के लिए सदन को पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
बेरोजगारी और HKRN पर कांग्रेस का फोकस
कांग्रेस इस सत्र में युवाओं और रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम की नियुक्ति प्रक्रिया, कर्मचारियों की स्थिति और इससे जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
विपक्ष सरकारी नौकरियों, भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के बीच बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। कांग्रेस के लिए HKRN पहले से ही एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है और इस बार विधानसभा में भी इसे प्रमुखता मिलने की संभावना है।
कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर भी सरकार को घेरने की तैयारी
हरियाणा कांग्रेस कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी गुजरात को दिए जाने के मुद्दे को भी सदन में उठाएगी। कांग्रेस की मांग है कि हरियाणा को आयोजन में को-ऑर्गेनाइजर राज्य की भूमिका मिलनी चाहिए।
पार्टी हरियाणा के खिलाड़ियों की उपलब्धियों और प्रदेश में मौजूद खेल ढांचे का हवाला देते हुए अपनी मांग रख सकती है। इस मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
INLD ने भी तैयार किए कई सवाल
इंडियन नेशनल लोकदल ने भी मानसून सत्र के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। इनेलो विधायक दल के नेता आदित्य देवीलाल ने पांच तारांकित और दो अतारांकित सवाल लगाए हैं। वहीं विधायक अर्जुन चौटाला की ओर से नौ तारांकित और एक अतारांकित सवाल लगाए गए हैं।
इसके अलावा दोनों विधायकों की ओर से कुल 10 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी दिए गए हैं। इससे साफ है कि इनेलो सीमित समय के बावजूद सरकार के सामने कई जनहित से जुड़े सवाल रखने की तैयारी में है।
बैंक घोटाला, भूजल और कानून-व्यवस्था पर सवाल
आदित्य देवीलाल की ओर से दिए गए ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में 550 करोड़ रुपये से अधिक के आईडीएफसी बैंक घोटाले का मुद्दा शामिल है। इसके साथ ही HKRN में कथित अनियमितताओं, लगातार गिरते भूजल स्तर और कैंसर के बढ़ते मामलों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
प्रॉपर्टी टैक्स को कलेक्टर रेट से जोड़ने और एवैक्यूई प्रॉपर्टी कानून से संबंधित मामलों का मुद्दा भी सदन में उठाया जा सकता है। प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार से सवाल किए जाएंगे।
नशे और शिक्षा व्यवस्था पर अर्जुन चौटाला के सवाल
अर्जुन चौटाला के प्रस्तावों में प्रदेश में नशे की बढ़ती समस्या को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद और एक लाख से अधिक बच्चों के स्कूल छोड़ने से जुड़े मुद्दे भी उठाए जाएंगे।
इन सवालों के जरिए शिक्षा व्यवस्था, युवाओं और नशे की समस्या को सदन की बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की जाएगी।
तीन दिन बाद फिर बैठेगा सदन
पहले दिन की कार्यवाही के बाद सदन में अंतराल रहेगा। विधानसभा की बैठक 31 अगस्त को फिर शुरू होगी। इसके बाद 1 सितंबर को विधायी कामकाज पूरा होने के साथ सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने का कार्यक्रम है।
छोटा सत्र, लेकिन बड़े राजनीतिक मुद्दे
मानसून सत्र की अवधि भले ही कम है, लेकिन मुद्दों की संख्या काफी ज्यादा है। विपक्ष रोजगार, HKRN, कानून-व्यवस्था, नशा, शिक्षा, कर्मचारियों और जनहित से जुड़े विषयों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। वहीं भाजपा सरकार अपनी नीतियों, योजनाओं और उपलब्धियों के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है।
ऐसे में इस बार विधानसभा में सिर्फ विधायी कामकाज ही नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव भी देखने को मिल सकता है। कम दिनों के इस सत्र में कौन सा मुद्दा सबसे ज्यादा गर्माता है और सरकार विपक्ष के सवालों का किस तरह जवाब देती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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