हरियाणा सरकार ने भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार करते हुए म्यूटेशन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमैटिक कर दिया है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने भूमि अभिलेख (लैंड रिकॉर्ड) व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए दाखिल-खारिज प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बना दिया है।

सरकार के इस कदम से अब राज्य में कहीं भी संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही संबंधित दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) स्वतः दर्ज हो जाएगा। यानी लोगों को अब रजिस्ट्री के बाद अलग से आवेदन देने और तहसीलों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को इन सुधारों की जानकारी देते हुए इसे राजस्व सेवाओं में बड़ा बदलाव बताया।

सरकार के मुताबिक, पिछले छह महीनों में लंबित दाखिल-खारिज मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। पहले राज्यभर में करीब 5 लाख मामले लंबित थे, जो अब घटकर लगभग 50 हजार रह गए हैं। शेष मामलों के जल्द निपटारे के लिए सरकार ने 10 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया है, जिसमें तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।

सुमिता मिश्रा ने बताया कि सुधार प्रक्रिया के तहत पुराने दाखिल-खारिज रिकॉर्ड को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया गया है। इससे अब जिला और राज्य स्तर के अधिकारी रियल टाइम में लंबित मामलों की निगरानी कर सकेंगे और देरी होने पर तुरंत हस्तक्षेप भी किया जाएगा। नई प्रणाली से राजस्व प्रशासन में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से लाखों संपत्ति मालिकों का समय और मेहनत बचेगी। रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज रिकॉर्ड एक साथ अपडेट होने से स्वामित्व संबंधी विवाद कम होंगे और पुराने रिकॉर्ड के कारण होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलेगी। अब लोगों को बार-बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।