चंडीगढ़। हरियाणा की नौकरशाही में एक बार फिर वरिष्ठता और पदोन्नति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने मुख्य सचिव के पद पर नियुक्ति के बाद इस बार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को स्पेशल चीफ सेक्रेटरी (Special Chief Secretary) का दर्जा नहीं दिया। इससे वरिष्ठ अधिकारियों सुधीर राजपाल और सुमिता मिश्रा को यह पद नहीं मिलने की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में बनी हुई है।
जानकारों के अनुसार, हरियाणा में पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को मुख्य सचिव के बाद स्पेशल चीफ सेक्रेटरी का दर्जा देने या ऐसी जिम्मेदारी सौंपने की परंपरा रही है, जहां वे सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करते थे। हालांकि इस बार सरकार ने पहले की व्यवस्था से अलग निर्णय लिया है, जिससे ब्यूरोक्रेसी में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पड़ोसी राज्य पंजाब में वर्तमान में तीन स्पेशल चीफ सेक्रेटरी कार्यरत हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेशल चीफ सेक्रेटरी बनाए जाने से सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता, क्योंकि मुख्य सचिव, स्पेशल चीफ सेक्रेटरी और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी का वेतनमान समान होता है। इसे मुख्य रूप से प्रशासनिक सम्मान और वरिष्ठता से जोड़कर देखा जाता है।

गौरतलब है कि हरियाणा में पूर्व में भी वरिष्ठ अधिकारियों को स्पेशल चीफ सेक्रेटरी या योजना बोर्ड के चेयरमैन जैसे पद देकर उनकी वरिष्ठता का सम्मान किया जाता रहा है। ऐसे में इस बार सरकार के फैसले ने प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि सरकार की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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