हरियाणा कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी संजय दत्त ने पदभार संभालते ही बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। हालांकि इन सांगठनिक बैठकों से ज्यादा पार्टी के भीतर मचे आंतरिक कलह और गुटबाजी की चर्चा राजनीतिक गलियारों में हो रही है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी संजय दत्त ने पदभार संभालने के बाद संगठन को सक्रिय करने की कवायद शुरू कर दी है। वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, सांसदों और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं, लेकिन इन बैठकों से ज्यादा चर्चा पार्टी के भीतर उभरकर सामने आई गुटबाजी की हो रही है। राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या संजय दत्त आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बिखरे संगठन को एकजुट कर पाएंगे।

प्रदेश प्रभारी के पहले दौरे के दौरान हुई बैठकों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को सार्वजनिक कर दिया। वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साफ कहा कि जब तक नेता विशेष की राजनीति से ऊपर उठकर कांग्रेस के लिए काम नहीं किया जाएगा, तब तक सत्ता में वापसी का सपना अधूरा ही रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हालात ऐसे बन चुके हैं कि अलग-अलग गुटों से जुड़े कार्यकर्ता कई बार एक-दूसरे से सामान्य बातचीत तक करने से बचते हैं। उनके अनुसार गुटबाजी होना असामान्य नहीं है, लेकिन जब वह संगठन पर हावी हो जाए तो पार्टी को नुकसान पहुंचाती है।

बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच मंच से हुई बातचीत ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। हुड्डा ने सुरजेवाला से साथ चलने की बात कही तो जवाब में सुरजेवाला ने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से उनका साथ देते आ रहे हैं, अब उनकी भी जिम्मेदारी बनती है। मंच से हुआ यह संवाद कांग्रेस के भीतर मौजूद राजनीतिक समीकरणों और अलग-अलग शक्ति केंद्रों की चर्चा को और हवा दे गया।

हरियाणा कांग्रेस पिछले करीब 12 वर्षों से सत्ता से बाहर है। 2024 के विधानसभा चुनाव में भी सत्ता हासिल करने का मौका हाथ से निकल गया। ऐसे में पार्टी ने अब 2029 को लक्ष्य बनाकर संगठन को मजबूत करने की रणनीति शुरू की है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पार्टी के भीतर गुटों के बीच तालमेल नहीं बनता, तब तक संगठनात्मक मजबूती का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।

ऐसे में सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश प्रभारी संजय दत्त के कंधों पर आ गई है। उन्हें केवल संगठन का विस्तार नहीं करना, बल्कि अलग-अलग गुटों के नेताओं के बीच विश्वास कायम कर एक साझा राजनीतिक दिशा भी तय करनी होगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि संगठनात्मक स्तर पर कुछ सख्त और संतुलित फैसले लिए जाते हैं तो कांग्रेस में नई ऊर्जा देखने को मिल सकती है।

फिलहाल प्रदेश प्रभारी की बैठकों से एक बात साफ हो गई है कि हरियाणा कांग्रेस की राह में सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि संगठन के भीतर मौजूद गुटबाजी है। अब देखना होगा कि संजय दत्त इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या वे कांग्रेस को एकजुट कर 2029 के चुनाव से पहले मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में खड़ा कर पाते हैं।