चंडीगढ़: हरियाणा में अपराध पर लगाम कसने के लिए पुलिस विभाग अब थाना स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी में है। DGP अजय सिंघल ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी थाना क्षेत्र में अपराध बढ़ता है तो केवल SHO (थाना प्रभारी) ही नहीं, बल्कि संबंधित सुपरवाइजरी अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं।
DGP अजय सिंघल ने पुलिस मुख्यालय में प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ करीब तीन घंटे तक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में थाना-वार अपराध की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के लिए माइक्रो-लेवल मॉनिटरिंग (सूक्ष्म स्तर पर निगरानी) मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए केवल आंकड़ों की समीक्षा पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक थाना क्षेत्र में अपराध के कारणों और स्थानीय अपराध पैटर्न (अपराध की प्रवृत्ति) का विश्लेषण कर उसी के अनुसार रणनीति तैयार करनी होगी। पुलिस को CCТNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) के डेटा का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए प्रिवेंटिव पुलिसिंग (अपराध रोकने की कार्रवाई) पर जोर देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में BNS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत दर्ज कुल अपराध में 9.11 प्रतिशत की कमी आई है। इसके बावजूद DGP ने अधिकारियों से अपराध नियंत्रण में और बेहतर परिणाम हासिल करने पर जोर दिया।
खराब प्रदर्शन पर होगी कार्रवाई
DGP ने साफ किया कि जिन थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहेगा, वहां SHO के साथ-साथ संबंधित सुपरवाइजरी अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होगी। पुलिसिंग में लापरवाही को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को काम के साथ-साथ उसके परिणाम पर भी ध्यान देने को कहा गया।
साइबर अपराध पर विशेष फोकस
बैठक में साइबर अपराध के लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे को लेकर भी निर्देश दिए गए। साइबर फ्रॉड में ठगी गई रकम को समय रहते फ्रीज (रोकना) और रिकवर (वापस दिलाना) कराने तथा पीड़ितों को जल्द राहत उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
इसके अलावा धमकी भरी कॉल, फायरिंग, अफवाहों और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं की रोकथाम के लिए समयबद्ध और आपसी समन्वय से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
DGP ने अधिकारियों को संदेश दिया कि अपराध नियंत्रण में केवल कार्रवाई दिखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर जमीन पर भी नजर आना चाहिए। पुलिस की कार्यप्रणाली अब परिणाम आधारित पुलिसिंग पर अधिक केंद्रित रहेगी।
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