चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में किसानों के ट्यूबवेल और नलकूप के पानी की मुफ्त वैज्ञानिक जांच कराई जाए। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके खेत और पानी की गुणवत्ता के अनुरूप फसल चयन की वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को यह जानकारी दी जाएगी कि उनके खेत के लिए कौन-सी फसल सबसे अधिक उपयुक्त रहेगी और किन फसलों की खेती से बचना चाहिए। सरकार इस पूरी व्यवस्था को ‘मेरा फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल से जोड़ेगी, ताकि किसान घर बैठे ही अपनी पानी जांच रिपोर्ट और उससे संबंधित कृषि सलाह डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकें।पानी की जांच में कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड सहित अन्य रासायनिक तत्वों का परीक्षण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों के लिए वैज्ञानिक फसल चयन की प्रभावी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे खेती की लागत कम हो और उत्पादन बढ़े।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कृषि विपणन बोर्ड के कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश में बनने वाली सभी सड़कों का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराने, कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही प्रदेश में 12 ग्रामीण हाट-पैठ सेंटर स्थापित करने की योजना की भी समीक्षा की गई। इन केंद्रों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय किसानों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से ग्रामीण मंडियों और सब्जी मंडियों में सफाई व्यवस्था मजबूत करने तथा किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देने के भी निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक खेती, बेहतर विपणन व्यवस्था और मजबूत आधारभूत ढांचे के जरिए किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।