हरियाणा सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को अतिरिक्त खाद्य सामग्री देने के उद्देश्य से पांच पड़ोसी राज्यों की राशन व्यवस्था का अध्ययन कराएगी।

चंडीगढ़। हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने वाले जरूरतमंद लोगों को मिलने वाले मासिक राशन की मात्रा और सामग्री बढ़ाने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है। सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की एक विशेष टीम उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली तथा हिमाचल प्रदेश समेत देश के कुल पांच प्रमुख राज्यों का विस्तृत दौरा करेगी। इस Haryana government ration distribution model के अंतर्गत सरकारी टीम इन राज्यों में जाकर जमीनी स्तर पर यह बारीकी से पता लगाएगी कि वहां गरीबों को राशन वितरण करने की प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन आखिर किस प्रकार से किया जा रहा है।

बीपीएल परिवारों के लिए अतिरिक्त खाद्य सामग्री की तैयारी

यह विशेष टीम पड़ोसी राज्यों का दौरा कर मुख्य रूप से यह रिपोर्ट तैयार करेगी कि वहां बीपीएल तथा अंत्योदय श्रेणी में आने वाले गरीब परिवारों को हर महीने क्या-क्या और कितनी मात्रा में जरूरी खाद्य वस्तुएं वितरित की जाती हैं। इस समीक्षा रिपोर्ट के आने के बाद यदि यह पाया जाता है कि उन राज्यों में गरीबों को कुछ अतिरिक्त पौष्टिक खाद्य पदार्थ मिल रहे हैं, तो ठीक वैसी ही कल्याणकारी व्यवस्था हरियाणा सरकार भी अपनी सामग्री सूची में जोड़ देगी। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में गहन अध्ययन कर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

एक राष्ट्र एक राशन कार्ड प्रणाली को मिलेगी मजबूती

प्रदेश सरकार दरअसल केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड’ प्रणाली को पूरी मजबूती देने के लिए यह बड़ा कदम उठा रही है। वर्तमान समय में हरियाणा में बीपीएल तथा अंत्योदय श्रेणी के करीब 40 लाख राशन कार्ड बने हुए हैं, जिसके तहत हर महीने लगभग 1.57 करोड़ लाभार्थियों को आवश्यक राशन वितरित किया जा रहा है। खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने बताया कि कुछ राज्यों में मुफ्त राशन के साथ चना और दाल देने की बातें भी सामने आई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दूसरे राज्यों की बेहतर वितरण प्रणाली का अध्ययन करने का फैसला किया है ताकि प्रदेश के गरीबों को अधिकतम लाभ दिया जा सके।