चंडीगढ़। हरियाणा में पीने के पानी (भूजल) की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला खुलासा हुआ है। प्रदेश में स्वास्थ्य के लिहाज से बड़ी इमरजेंसी की स्थिति खड़ी हो गई है। विधानसभा में रखी गई एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के 142 ब्लॉकों में से 93 ब्लॉकों (यानी करीब 66% इलाकों) का भूजल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार द्वारा साझा की गई इस जानकारी के बाद राज्य की नायब सिंह सैनी सरकार विपक्षी दलों और जनता के सीधे निशाने पर आ गई है।
तय मानकों की उड़ीं धज्जियां: 71 गांवों में पानी बना जानलेवा
स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, सुरक्षित पेयजल में टीडीएस (TDS – कुल घुलनशील ठोस) की मात्रा 150 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होनी चाहिए। मगर प्रदेश की स्थिति यह है कि हर 10 में से 6 ब्लॉकों में पानी खतरनाक स्तर को पार कर चुका है। 142 में से 33 ब्लॉक ऐसे हैं जहां टीडीएस का औसत स्तर 1,000 से लेकर 1,845 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं, राज्य के 71 गांव ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जहां टीडीएस 3,000 से लेकर 9,553 मिलीग्राम प्रति लीटर के उस जानलेवा स्तर पर है जो किसी भी इंसान को गंभीर रूप से बीमार करने के लिए काफी है।
बीमारियां बढ़ीं: 7 साल में 7 गुना बढ़ीं शिकायतें
दूषित पानी के इस ‘धीमे जहर’ ने प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अत्यधिक टीडीएस वाला पानी लगातार पीने से पथरी, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी फेलियर और पेट की गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।आंकड़े बताते हैं कि बीते 7 वर्षों में पाइपलाइन लीकेज और सीवरेज का गंदा पानी मिलने की वजह से हेपेटाइटिस-ए के 3,249 मामले सामने आ चुके हैं। साल 2019 में जहां दूषित पानी की 1,356 शिकायतें थीं, वहीं साल 2025 में यह संख्या बढ़कर 9,769 हो गई। अकेले रोहतक जिले में यह शिकायतें 12.5 गुना बढ़कर 7,353 तक पहुंच चुकी हैं।
मासूमों की मौत पर भी बेपरवाह प्रशासन
पानी में घुले इस जहर की कीमत अब मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। इसी साल फरवरी 2026 में पलवल के छयांसा गांव में दूषित पानी के कारण 15 दिनों के भीतर 12 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 5 मासूम बच्चे शामिल थे। वहीं, जुलाई 2026 में कैथल के सजुमा गांव में दूषित पानी पीने से 70 से अधिक बच्चे हेपेटाइटिस-ए और पेट के गंभीर संक्रमण का शिकार हो गए, जिसमें इलाज के दौरान पीजीआई चंडीगढ़ में एक 11 वर्षीय बच्ची रितिक की मौत हो गई।
बुनियादी ज़िम्मेदारी में भी फेल भाजपा सरकार
एक तरफ जहां पूरी दुनिया मानती है कि “जल ही जीवन है”, वहीं हरियाणा में जर्जर पाइपलाइनों और सरकारी अनदेखी के कारण घरों के नलों तक गंदा और जहरीला पानी पहुंच रहा है। जनता का आरोप है कि स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत को पूरा करने में भी पूरी तरह विफल रही भाजपा सरकार हरियाणा के लोगों को ‘धीमा जहर’ परोस रही है। सत्ता की सुख-सुविधाओं में डूबी नायब सैनी सरकार के पास जनता की इस चीख-पुकार को सुनने का जैसे वक्त ही नहीं है।
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