हरियाणा सरकार प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार किया जाएगा। अब विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी जैसे इंडस्ट्री बेस्ड कोर्स शामिल किए जाएंगे।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में उच्च शिक्षा की तस्वीर अब तेजी से बदलने वाली है। पारंपरिक पढ़ाई के साथ अब युवाओं को भविष्य की तकनीकों और उद्योगों की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और मशीन लर्निंग जैसे आधुनिक विषय अब विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन रहे हैं। इसके साथ ही सरकार हर जिले में मॉडल संस्कृति कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रही है।
दरअसल, हरियाणा सरकार प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, रोजगारपरक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक मॉडल संस्कृति कॉलेज स्थापित करने की योजना पर कार्य शुरू हो चुका है। कुल 22 मॉडल संस्कृति कॉलेजों को स्वायत्त बहुविषयक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि क्षेत्रीय मेगा एजुकेशनल हब भी स्थापित किए जाएंगे ताकि अनुसंधान और शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ावा मिल सके।
चंडीगढ़ में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में इन सुधारों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के अनुरूप सभी सुधारात्मक पहलों को तय समय सीमा में लागू करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि हरियाणा के विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर के शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि प्रदेश के युवा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों ने आधुनिक तकनीकों को पाठ्यक्रम में शामिल करना शुरू कर दिया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स को अपने कार्यक्रमों में जोड़ा है। वहीं भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में AI, ड्रोन टेक्नोलॉजी, जियो-इन्फॉर्मेटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्स शुरू किए गए हैं। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, रेवाड़ी ने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिकता और सतत विकास को भी शिक्षा प्रणाली में शामिल किया है।
सरकार विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दे रही है। इसके तहत कई विश्वविद्यालयों में उद्योग विशेषज्ञों को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिल सके। इसके अलावा शिक्षकों के रिक्त पदों की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
हरियाणा सरकार की ‘अर्न व्हाइल लर्न’ योजना का भी विस्तार किया जा रहा है, जिससे 2024-25 में करीब 7,000 विद्यार्थियों को लाभ मिला है। अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री प्रोग्राम और रोजगारपरक शिक्षा के जरिए युवाओं को नौकरी के लिए अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में ये सुधार हरियाणा के युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।

