कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के लिए यह बेहद गर्व और उत्साह का क्षण है। कला और खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली दो हस्तियों को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है। हथकरघा एवं पारंपरिक बुनाई कला को नई पहचान दिलाने वाले खेमराज सुंद्रियाल तथा भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार गोलकीपर सविता पूनिया को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री सम्मान प्रदान किया।

मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से संबंध रखने वाले और पानीपत को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले 83 वर्षीय खेमराज सुंद्रियाल ने हैंडलूम क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने पानीपत के पारंपरिक खेस को आधुनिक डिजाइन, रंगों और तकनीकों के साथ नई पहचान दिलाई। जामादानी और टेपेस्ट्री जैसी जटिल बुनाई कलाओं में महारत रखने वाले सुंद्रियाल अब तक देशभर के 10 हजार से अधिक बुनकरों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। उनके प्रयासों ने न केवल पारंपरिक कला को जीवित रखा, बल्कि हजारों परिवारों को रोजगार और सम्मान भी दिलाया।

वहीं, सिरसा जिले के जोधका गांव की रहने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया को खेल क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। अपनी शानदार गोलकीपिंग के कारण ‘द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध सविता ने टोक्यो ओलंपिक सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को यादगार सफलताएं दिलाई हैं। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय महिला हॉकी को नई पहचान दी है।

सविता पूनिया आज हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। वहीं खेमराज सुंद्रियाल का जीवन पारंपरिक कला, नवाचार और समाज सेवा का अद्भुत उदाहरण है। इन दोनों विभूतियों को मिला पद्मश्री सम्मान हरियाणा की समृद्ध खेल और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है।