कुरुक्षेत्र के नए बस स्टैंड पर सोमवार को हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने मुख्य गेट बंद कर प्रदर्शन किया और बसों की आवाजाही रोक दी। कैथल आरटीओ द्वारा सरकारी बसों के चक्कर घटाकर निजी बसों को लाभ पहुंचाने के विरोध में शुरू हुआ यह प्रदर्शन अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ।

कुरुक्षेत्र। स्थित नए बस स्टैंड पर सोमवार को रोडवेज कर्मचारियों ने विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने बसों का परिचालन रोक दिया, जिससे यात्रा कर रहे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कर्मचारी सरकारी बसों के रूट के चक्कर घटाने और निजी बसों को अधिक समय देने का विरोध कर रहे थे।

निजी बसों को लाभ पहुंचाने का आरोप

आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि कुरुक्षेत्र डिपो से कैथल मार्ग पर चलने वाली सरकारी बसों के चक्करों में कटौती की गई है, जबकि निजी बस चालकों को अतिरिक्त चक्कर दिए गए हैं। ऑल हरियाणा रोडवेज के प्रेस प्रवक्ता रंजीत करोड़ा ने कैथल आरटीओ पर आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसा समय निर्धारित किया गया है, जिससे यात्रियों को रोडवेज की बसें समय पर न मिलें। दोपहर में लंबे अंतराल के बाद बसें मिलती हैं, वहीं शाम पांच बजे के बाद एक साथ कई बसों का समय तय कर दिया गया है। इससे मजबूर होकर यात्रियों को निजी गाड़ियों में अधिक किराया देकर सफर करना पड़ता है।

बार-बार शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं

प्रवक्ता रंजीत करोड़ा के अनुसार, इस विषय में विभागीय अधिकारियों और सरकार को बार-बार अवगत कराया गया, परंतु कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। इससे सरकारी खजाने को आर्थिक क्षति हो रही है और निजी बस संचालकों को अनुचित लाभ मिल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

आश्वासन मिलने के बाद बहाल हुआ आवागमन

प्रदर्शन और गेट बंद होने की सूचना पाकर नए बस स्टैंड के सीआई इंचार्ज भगवत दयाल शर्मा मौके पर पहुंचे और कर्मचारी नेताओं से वार्ता की। उन्होंने कर्मचारियों को विश्वास दिलाया कि फिलहाल नए समय चक्र को लागू नहीं किया जाएगा और पूर्व में जारी टाइम टेबल के आधार पर ही बसों का संचालन होगा। प्रशासनिक आश्वासन के उपरांत कर्मचारियों ने बस स्टैंड का गेट खोल दिया, जिसके बाद रुकी हुई बसें गंतव्य के लिए रवाना हुईं। हालांकि संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया तो वे पुनः आंदोलन करने को बाध्य होंगे।