Lalluram Desk. आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व इस साल 29 जुलाई, बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित है । जहां जीवन में मार्ग दर्शन देने वाले हर गुरु के प्रति आभार व्यक्त किया जाता हैl
गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि वह हर रूप है जो हमें सही दिशा दिखाता है। यही कारण है कि इस दिन माता-पिता से लेकर आध्यात्मिक गुरु और जगतगुरु तक सभी का सम्मान और पूजन, कर आशीर्वाद लिया जाता है। इस पर्व पर सच्चे मन से गुरु का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और सुख,समृद्धि का संचार होता हैl
पांच प्रकार के गुरुओं का पूजन देता है विशेष फल
गुरु पूर्णिमा पर पांच प्रमुख गुरु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। सबसे पहले माता को जीवन की प्रथम गुरु माना जाता है। जो हमें संस्कार और मूल्यों की शिक्षा देती हैं। पिता को दूसरा गुरु माना गया है, जो अनुशासन और जीवन की दिशा सिखाते हैं। इसके बाद शिकक्ष का स्थान आता है, जो विद्या और ज्ञान प्रदान करते है। आध्यात्मिक गुरु आत्मा के मार्ग को प्रकाशित करते है। अंत में जगतगुरु, जिन्हें समस्त सृष्टि का मार्ग दर्शक माना जाता है। महर्षि वेदव्यास को आदिगुरु के रूप में पूजने की परंपरा भी, इसी दिन से जुड़ी है। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
ऐसे करें गुरु पूर्णिमा की पूजा
इस पावन दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करे। इसके बाद घर के पूजा स्थल को शुद्ध कर दीप प्रज्वलित किया जाता है। गुरु का ध्यान किया जाता है। पूजन के दौरान भगवान विष्णु या महर्षि वेद व्यास की तस्वीर स्थापित कर रोली, अक्षत, पुष्प और फल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धा के साथ गुरु मंत्र या गुरू ब्रह्मा, गुरू विष्णु… का जप करना अत्यंत शुभ है। इसके अलावा अपने गुरु को कपड़े, दक्षिणा या उपहार अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है । इस दिन दान-पुण्य और सेवा कार्य करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
यह पर्व कृतज्ञता और ज्ञान का प्रतीक है
गुरू पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं, बल्कि जीवन में मार्गदर्शन देने वालों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रटक करने का अवसर है। यह पर्व अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का संदेश देता है और व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है।
ये शुभ फल पूजन से मिलते हैं
गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। र जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं, वहीं परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है । इस प्रकार यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक उत्सव भी है।
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