कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) के बढ़ते प्रकोप ने पशुपालकों की चिंता फिर बढ़ा दी है। ग्रामीण इलाकों में खासकर गायों के इस बीमारी की चपेट में आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बीमारी के कारण पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज और उन्हें बचाने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। वहीं, कई जगहों पर पशुओं की हालत गंभीर होने से पशुपालक हताश नजर आ रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के प्रमुख अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंपी बीमारी को लेकर सरकार की कथित लापरवाही का खामियाजा सीधे पशुपालकों को भुगतना पड़ रहा है। चौटाला के मुताबिक, बीमारी पहले भी पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा चुकी है और अब दोबारा इसके फैलने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

अभय चौटाला ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पशुपालक पशुओं पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी पशु के बीमार पड़ने या उसकी मौत होने से परिवार की आय पर सीधा असर पड़ता है। उनका आरोप है कि सरकार को बीमारी के शुरुआती संकेत मिलते ही गांव स्तर पर प्रभावी निगरानी, उपचार और रोकथाम की व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन पशुपालकों को अपेक्षित मदद नहीं मिल रही।

पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता बीमारी के इलाज और पशु चिकित्सकीय सुविधाओं को लेकर बताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्तर पर पर्याप्त उपचार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में कई पशुपालक निजी पशु चिकित्सकों का सहारा लेने को मजबूर हैं। इससे उनके ऊपर महंगे इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

चौटाला ने सरकार से मांग की कि लंपी बीमारी को लेकर पूरे प्रदेश में स्पष्ट और विशेष एडवाइजरी जारी की जाए। गांव-गांव पशु चिकित्सा टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ संक्रमित पशुओं की पहचान, उपचार और बीमारी को दूसरे पशुओं तक फैलने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

वहीं, पशुपालकों का कहना है कि लंपी का प्रकोप उनके लिए नया संकट नहीं है। पिछली बार भी बड़ी संख्या में पशु बीमारी की चपेट में आए थे और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। अब दोबारा बीमारी फैलने से उन्हें डर है कि अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नुकसान और बढ़ सकता है।

अभय चौटाला ने सरकार से पशुपालकों को राहत देने और बीमारी की रोकथाम के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों के सामने खड़े इस संकट को केवल पशुओं की बीमारी के तौर पर नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़े गंभीर मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m