फरीदाबाद में पवन कुमार नाम के व्यक्ति को सरकारी डेटा में मृत घोषित कर दिया गया। इस गलती के कारण उनकी बेटी की शादी के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता भी रुक गई है।
फरीदाबाद। जरा सोचिए, आप जिंदा हों… घर-परिवार के साथ रह रहे हों… लेकिन सरकारी कागजों में आपको ‘मृत’ घोषित कर दिया जाए। इतना ही नहीं, आपकी पत्नी को भी विधवा बना दिया जाए। सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन हरियाणा के फरीदाबाद में 50 वर्षीय पवन कुमार के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। अब वे महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सिस्टम की गलती उनकी जिंदगी पर भारी पड़ रही है।
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पवन कुमार ने अपनी बेटी की शादी के लिए सरकार की कन्यादान योजना के तहत आवेदन किया। आवेदन की जांच में सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड में पवन कुमार ‘मृत’ हैं और उनकी पत्नी ‘विधवा’ दर्ज है। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। बेटी की शादी के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता भी अटक गई और परिवार अचानक संकट में आ गया।
बताया जा रहा है कि यह गड़बड़ी परिवार पहचान पत्र (PPP) के डेटा में सामने आई है। पवन कुमार का आरोप है कि गलती सुधारने के लिए उन्हें कई महीनों से अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कभी समाधान शिविर, कभी स्थानीय कार्यालय… लेकिन राहत अब तक नहीं मिली। हैरानी की बात यह है कि उन्हें खुद को ‘जिंदा’ साबित करने के लिए बच्चों की मार्कशीट, वोटर आईडी, पुराना राशन कार्ड और कई पहचान संबंधी दस्तावेज जमा करने को कहा गया।
उधर, जिला प्रशासन का कहना है कि शुरुआती स्तर पर डेटा एंट्री के दौरान या नागरिकों द्वारा स्वयं जानकारी भरने में हुई तकनीकी गलती की वजह से यह मामला सामने आया है। अतिरिक्त उपायुक्त ने दावा किया है कि रिकॉर्ड ठीक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन बड़ा सवाल यही है- अगर एक जिंदा इंसान को सरकारी सिस्टम मृत बना सकता है, तो आम आदमी आखिर भरोसा किस पर करें।

