अजय सैनी, भिवानी. हरियाणा सरकार के डिजिटल दावों के विपरीत जमीन पर शादी पंजीकरण के नाम पर जनता को प्रताडि़त करने का बड़ा मामला सामने आया है। ह्यूमन राइट्स एंड एंटी करप्शन कौंसिल ने इसके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भिवानी के उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी और तहसीलदार को एक सख्त मांग पत्र सौंपा है।
कौंसिल के चेयरमैन एडवोकेट शिव कुमार बेडवाल और सचिव एडवोकेट अजय सभ्रवाल ने बताया कि जून 2024 में हरियाणा सरकार द्वारा किए गए संशोधन (अधिनियम सब-सेक्शन 4.3) के तहत शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए दूल्हा-दुल्हन, माता-पिता या गवाहों को रजिस्ट्रार कार्यालय जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जिसमें आधार ई-केवाईसी के जरिए ही ऑनलाइन सहमति ले ली जाती है। आधार वेरिफिकेशन के बाद सीधे मैरिज सर्टिफिकेट जारी करने का प्रावधान है।
उन्होंने मैरिज रजिस्ट्रेशन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाकर अधिकारी जानबूझकर जोड़ों और बुजुर्ग माता-पिता को भौतिक सत्यापन के नाम पर दफ्तरों में बुला रहे हैं। यह अनावश्यक उपस्थिति केवल और केवल रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का जरिया बन चुकी है, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन है। आम जनता, बुजुर्ग माता-पिता और कामकाजी जोड़ों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर कटवाकर प्रताडि़त किया जा रहा है, जो कि सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन है।

उन्होंने मांग की कि जून 2024 के ऑनलाइन मैरिज रजिस्ट्रेशन संशोधन को जिला स्तर पर तुरंत और सख्ती से लागू किया जाए। दफ्तरों में गवाहों और जोड़ों को बुलाने की अवैध भौतिक उपस्थिति व्यवस्था तुरंत बंद हो।। नयमों की अवहेलना कर जनता को परेशान करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।
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