चंडीगढ़ : खेलों के क्षेत्र में अग्रणी पहचान बना चुके हरियाणा ने अब 2036 ओलंपिक को लक्ष्य बनाकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार ने ‘मिशन ओलंपिक 2036 – विजयी भवः’ के तहत 8 से 10 वर्ष के बच्चों की शुरुआती उम्र से ही प्रतिभा निखारने के लिए एक दीर्घकालिक टैलेंट पहचान कार्यक्रम शुरू किया है। इसके साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन स्पोर्ट’ पहल के जरिए हर जिले में खेल प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें समान अवसर देने का अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में खेल, शिक्षा, पोषण और उच्च शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन के अनुरूप हरियाणा तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य का फोकस पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित प्रशासन पर है, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ हर वर्ग तक पहुंचे।

महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों को अब जन्म से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए बेहतर प्रारंभिक शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के 4,000 से अधिक केंद्रों में प्री-स्कूल किट, खिलौने, फर्नीचर, स्वच्छता सामग्री और आरओ पानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जबकि 21,962 अतिरिक्त केंद्रों को विशेष शिक्षण सामग्री दी गई है।

राज्यभर में 25,000 प्रशिक्षित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, 88 मास्टर ट्रेनरों के मार्गदर्शन में, लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और देखभाल प्रदान कर रहे हैं। ‘खेल-खेल में सीखना’ और ‘स्वच्छता एवं अच्छी आदतें’ जैसे कार्यक्रमों के तहत हर महीने हजारों कार्यकर्ता और लाखों अभिभावक भाग ले रहे हैं, जिससे सामुदायिक भागीदारी भी मजबूत हो रही है।

निपुण भारत मिशन का विस्तार मार्च 2027 तक

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावक-शिक्षक बैठकों, होम विजिट्स और विद्यारंभ प्रमाणपत्र वितरण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में ‘निपुण भारत मिशन’ का विस्तार मार्च 2027 तक पांचवीं कक्षा तक करने की योजना है। साथ ही, 0 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए डिजिटल आईडी (अपार और आभा) जारी करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
स्वास्थ्य और पोषण को मजबूत करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं, जहां बच्चों को ताजा फल और सब्जियां उपलब्ध होंगी। स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा देने के लिए विशेष किट भी वितरित की जा रही हैं।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड (HSRF) की शुरुआत 20 करोड़ रुपये की राशि से की गई है। इस योजना के तहत शिक्षकों को 50 लाख और विद्यार्थियों को 5 लाख रुपये तक का अनुसंधान अनुदान दिया जा रहा है। अब तक 350 प्रस्तावों में से 90 का चयन किया जा चुका है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विश्वविद्यालयों में क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं और पूर्व छात्रों के नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि शोध और नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई।