Haryana New Town Planning Policy : चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने छोटे शहरों के नियोजित विकास के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 76 नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए पहली बार अलग टाउन प्लानिंग नीति लागू की है। नई व्यवस्था का उद्देश्य बिना योजना के बसने वाली अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाना और लोगों को शुरुआत से ही सड़क, पानी, सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं वाली कॉलोनियां उपलब्ध कराना है।

नई नीति के तहत अब कोई भी निजी डेवलपर सरकारी लाइसेंस के बिना कॉलोनी विकसित नहीं कर सकेगा। लाइसेंस लेने के लिए कम से कम पांच एकड़ जमीन होना जरूरी होगा। इसके साथ ही कॉलोनी तक 33 फुट चौड़ी सड़क का संपर्क अनिवार्य रहेगा, जबकि अंदर की सड़कें कम से कम 10 मीटर चौड़ी बनानी होंगी। पार्क, सार्वजनिक स्थल और अन्य सामुदायिक सुविधाएं भी स्वीकृत नक्शे के अनुसार पहले विकसित करनी होंगी।

सरकार ने साफ किया है कि अब सिर्फ प्लॉट काटकर बेचने की अनुमति नहीं होगी। डेवलपर को पेयजल, सीवरेज, वर्षा जल निकासी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पहले सुनिश्चित करनी होगी। जहां सरकारी जलापूर्ति उपलब्ध होगी, वहां उसी से कनेक्शन लिया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में सीवर नेटवर्क नहीं है तो डेवलपर को अपनी ओर से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाना होगा।

नई नीति में किफायती आवास को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके अनुसार कुल प्लॉटों में कम से कम 50 प्रतिशत प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के होंगे, ताकि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को आसानी से मकान मिल सके। वहीं परियोजना क्षेत्र का अधिकतम 65 प्रतिशत हिस्सा आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए रखा जाएगा, जबकि व्यावसायिक गतिविधियों की सीमा 5 प्रतिशत तय की गई है।

सरकार ने पहली बार नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों के लिए लाइसेंस शुल्क और प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि नई नीति से अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी रोक लगेगी और छोटे शहरों में योजनाबद्ध, पारदर्शी और टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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