हरियाणा में गुरुग्राम व नूंह में निजी कंपनियों को समानांतर लाइसेंस देने और एग्री डिस्काम के विरोध में बिजली यूनियनों ने 11 से 13 अगस्त तक तीन दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया है। चार प्रमुख यूनियनों के गठबंधन 'हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा' की 16 सदस्यीय कमेटी इस आंदोलन की अगुवाई करेगी।
चंडीगढ़। बिजली क्षेत्र के निजीकरण के प्रयासों के विरोध में बिजली निगमों के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने एकजुट होकर बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुग्राम तथा नूंह जिलों में निजी संस्थाओं को समानांतर लाइसेंस वितरित करने, कृषि क्षेत्र के लिए पृथक एग्री डिस्काम गठित करने और स्मार्ट मीटरिंग प्रक्रिया के खिलाफ चार प्रमुख संगठनों ने मिलकर ‘हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ की स्थापना की है। इस नए मोर्चे ने आगामी 11 से 13 अगस्त तक पूरे प्रदेश में तीन दिनों की हड़ताल का आधिकारिक तौर पर एलान किया है।
16 सदस्यीय कमेटी संभालेगी कमान
इस व्यापक विरोध प्रदर्शन का संचालन मोर्चे की 16 सदस्यों वाली विशेष कमेटी द्वारा किया जाएगा। इस मोर्चे में हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन, एचएसईबी वर्कर यूनियन तथा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन (एससी-बीसी-एसटी) शामिल हैं। इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा के अनुसार, हड़ताल पर जाने से पहले राज्य भर में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।
चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा
योजना के तहत 29 जुलाई को प्रदेश के सभी सर्किलों में जोरदार प्रदर्शन किए जाएंगे। कर्मचारी उपायुक्त कार्यालयों तक पैदल मार्च निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे और इन्हीं प्रदर्शनों के बीच मोर्चे की सर्किल कमेटियों का गठन होगा। इसके पश्चात 3 से 5 अगस्त तक डिवीजन स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संघर्ष मंच के अलावा संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियनें भी सहभागिता करेंगी।
आंदोलन के तीसरे चरण में 6 से 8 अगस्त के बीच सभी सब-डिवीजन स्तरों पर सभाएं होंगी, जहां आम जनता और किसानों को निजीकरण के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद 10 अगस्त को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के सहयोग से व्यापक प्रदर्शन होंगे, जिसके अगले दिन यानी 11 अगस्त से कर्मचारी तीन दिवसीय हड़ताल की शुरुआत करेंगे।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगे
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार के समक्ष अपनी कई मांगें रखी हैं:
- निजीकरण की सभी गतिविधियों जैसे समानांतर लाइसेंस देने, एग्री डिस्काम और स्मार्ट मीटरिंग योजना को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।
- सभी श्रेणी के अनुबंध कर्मचारियों को पक्का किया जाए तथा वर्तमान कार्यभार के अनुसार नए पदों का सृजन हो।
- खाली पड़े पदों पर स्थायी नियुक्तियां की जाएं, आरक्षित वर्ग के बैकलॉग को भरा जाए और अनुकंपा नियुक्ति (एक्सग्रेसिया) योजना से कठोर शर्तों को हटाया जाए।
- कर्मचारियों को जोखिम भत्ता प्रदान किया जाए एवं बढ़ती महंगाई के अनुपात में समस्त भत्तों में वृद्धि की जाए।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) पुनः बहाल की जाए तथा एनपीएस से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए मेडिकल अलाउंस व बिलों के भुगतान की सुविधा दी जाए।
- अंतर-उपयोगिता स्थानांतरण (इंटर यूटीलिटीज ट्रांसफर) लागू हो और महिला कर्मियों हेतु पृथक विश्राम कक्ष व क्रेश की व्यवस्था की जाए।
- कॉमन कैडर के कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाए तथा बिजली उत्पादन व वितरण निगमों में पदों का पुनर्गठन संपन्न हो।


