कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 23वें दिन भी जारी है। प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के बीच सरकार और कर्मचारी यूनियनों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। लंबे समय से चले आ रहे इस गतिरोध के बीच जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए एक गंभीर आरोप लगाया है।
दुष्यंत चौटाला का कहना है कि सफाई कर्मचारियों की मांगों का समाधान न निकल पाने के पीछे एक ‘गिरोह’ की भूमिका हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गिरोह सरकार से तो प्रत्येक कर्मचारी के लिए न्यूनतम मजदूरी हासिल कर रहा है, लेकिन सफाई कर्मचारियों को उससे कहीं कम भुगतान किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या कर्मचारियों और सरकार के बीच कोई ऐसी व्यवस्था या बिचौलिया तंत्र सक्रिय है, जिसके कारण सफाई कर्मचारियों को उनका पूरा हक नहीं मिल पा रहा?
23 दिन से हड़ताल, शहरों की सफाई व्यवस्था प्रभावित
सफाई कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा है। जगह-जगह कचरा जमा होने और नियमित सफाई प्रभावित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बावजूद कोई ऐसा फार्मूला सामने नहीं आया है, जिससे हड़ताल खत्म कराई जा सके।
ऐसे में दुष्यंत चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 23वें दिन भी कर्मचारियों की हड़ताल जारी है, लेकिन मुख्यमंत्री के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। उनके मुताबिक शहरों की सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है, लेकिन मुख्यमंत्री के पास सफाई कर्मचारियों से बातचीत करने तक का समय नहीं है।
आरोप सही हैं तो किसकी तय होगी जिम्मेदारी?
दुष्यंत चौटाला के ‘गिरोह’ वाले आरोप ने सरकार के सामने एक और सवाल खड़ा कर दिया है। यदि किसी एजेंसी, ठेकेदार या व्यवस्था के माध्यम से सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी कर्मचारियों तक पूरी नहीं पहुंच रही है, तो इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? क्या सरकार ने इस संबंध में कोई जांच कराई है और क्या कर्मचारियों को निर्धारित मजदूरी का पूरा भुगतान हो रहा है?
वहीं, यदि सरकार की ओर से इन आरोपों को गलत माना जाता है तो इस पर स्थिति स्पष्ट करना भी जरूरी होगा, ताकि कर्मचारियों के बीच पैदा हो रही आशंकाओं को दूर किया जा सके। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 23 दिन से जारी हड़ताल का आखिर समाधान कब निकलेगा और शहरों में बिगड़ी सफाई व्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी?
दुष्यंत चौटाला के बयान ने सफाई कर्मचारियों की मांगों के साथ-साथ उस पूरी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके तहत सरकार से मिलने वाली राशि और कर्मचारियों तक पहुंचने वाले वास्तविक भुगतान के बीच कथित अंतर की बात सामने आई है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और हड़ताल खत्म कराने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।
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