यमुनानगर। सावन शिवरात्रि नजदीक आते ही हरियाणा में कांवड़ियों की आवाजाही बढ़ गई है। 11 अगस्त को होने वाली सावन शिवरात्रि के लिए शिवभक्त हरिद्वार और नीलकंठ महादेव से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों की ओर लौट रहे हैं। यमुनानगर में पहुंच रहे कांवड़ियों का जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है। सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने उनके लिए लंगर, ठहरने और चिकित्सा की व्यवस्था भी की है।

इस बार कांवड़ यात्रा में कई तरह की कांवड़ लोगों का ध्यान खींच रही हैं। इनमें करीब 2 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई विशेष कांवड़ सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसे देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ भी जुट रही है।

इसके अलावा कई श्रद्धालु 51 लीटर और 21 लीटर गंगाजल लेकर पैदल अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। भारी कांवड़ होने के बावजूद शिवभक्त पूरे उत्साह के साथ यात्रा कर रहे हैं। रास्ते में ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

यमुनानगर में कांवड़ियों की सुविधा के लिए अलग-अलग जगहों पर सेवा शिविर लगाए गए हैं। यहां श्रद्धालुओं को भोजन, पानी और आराम की सुविधा दी जा रही है। कई स्थानों पर स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी की गई है।

शिवभक्तों का कहना है कि कांवड़ यात्रा उनके लिए सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति आस्था और समर्पण का प्रतीक है। उनका कहना है कि भोलेनाथ की कृपा से ही वे इतनी लंबी और कठिन यात्रा पूरी कर पा रहे हैं।

अब श्रद्धालुओं का पूरा ध्यान 11 अगस्त को होने वाले जलाभिषेक पर है। गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़िए लगातार अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं और शिव मंदिरों में जल चढ़ाने की तैयारी में जुटे हैं।

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