परवेज खान, यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर में मानसून के खतरे को देखते हुए हथनीकुंड बैराज पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। बैराज की सुरक्षा के लिए 146 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक डायाफ्राम वॉल पहली बार बड़े जल दबाव की परीक्षा देगी। सिंचाई विभाग का दावा है कि चीनी तकनीक से तैयार यह दीवार तेज बहाव और कटाव से बैराज को सुरक्षित रखने में सक्षम है।

यमुनानगर में मानसून के सक्रिय होते ही हथनीकुंड बैराज पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण यमुना नदी का जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गए हैं।

डायाफ्राम वॉल इस बार सबसे बड़ी सुरक्षा कवच
बैराज की सुरक्षा के लिए करीब 146 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई डायाफ्राम वॉल इस बार सबसे बड़ी सुरक्षा कवच मानी जा रही है। विभाग का दावा है कि विशेष तकनीक से निर्मित यह दीवार तेज जल प्रवाह और कटाव का सामना करते हुए बैराज की नींव को सुरक्षित रखेगी। अधिकारियों के अनुसार, चीनी तकनीक पर आधारित इस डायाफ्राम वॉल का प्रयोग देश में पहली बार हथनीकुंड बैराज पर किया गया था।

सिंचाई विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रवीण गुप्ता ने बताया कि मानसून को देखते हुए फ्लड कंट्रोल रूम को 24 घंटे के लिए सक्रिय कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब और उत्तराखंड के डाकपत्थर से लगातार जलस्तर और फ्लड अलर्ट की जानकारी ली जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।


सभी संवेदनशील गांव अलर्ट पर
विभाग के मुताबिक, पहाड़ों में बारिश बढ़ने पर यमुना में अचानक पानी का बहाव तेज हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए नदी किनारे बसे सभी संवेदनशील गांवों को अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

फिलहाल विभाग को भरोसा है कि हाईटेक डायाफ्राम वॉल, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और लगातार मॉनिटरिंग के दम पर हथनीकुंड बैराज मानसून की चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें, यमुना के किनारों पर जाने से परहेज करें और किसी भी चेतावनी को गंभीरता से लें।