अनिल मालवीय, सीहोर। माता-पिता अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई और जमीन-जायदाद अपने बच्चों के खुशहाल भविष्य के लिए उनके नाम कर देते हैं, लेकिन जब वही बच्चे बुढ़ापे में मां-बाप को बेसहारा छोड़ दें, तो दिल छिन्न-भिन्न हो जाता है। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला सीहोर जिले की जनसुनवाई में सामने आया, जहां एक 95 वर्षीय बेबस मां को अपने ही बेटों के खिलाफ न्याय की गुहार लगाने व्हीलचेयर पर आना पड़ा।
जमीन बांटते ही वादे से मुकरे बेटे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रेहटी तहसील के ग्राम मोगरा की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला वक्ता बाई मंगलवार को व्हीलचेयर पर बैठकर कलेक्ट्रेट स्थित जनसुनवाई में पहुंचीं। उन्होंने अतिरिक्त कलेक्टर को अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि पति की मृत्यु के बाद उन्होंने अपनी 15 एकड़ उपजाऊ जमीन अपने तीनों बेटों में बराबर बांट दी थी।
जमीन के बंटवारे के समय तीनों बेटों ने वादा किया था कि वे अपनी मां की देखरेख करेंगे और भरण-पोषण के लिए हर महीने 10-10 हजार रुपये देंगे। लेकिन यह वादा महज कुछ महीनों तक ही चला। जमीन हाथ में आते ही बेटों के तेवर बदल गए और उन्होंने अपनी बुजुर्ग मां को बेसहारा और लावारिस हालत में छोड़ दिया। बूढ़ी मां मैंने पेट काटकर बेटों को 15 एकड़ जमीन दी, ताकि बुढ़ापे में लाठी का सहारा बनें। पर जमीन मिलते ही उन्होंने मुझे दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया।
अब वापस चाहिए अपनी जमीन
भरण-पोषण और न्याय के लिए भटक रही वक्ता बाई ने अतिरिक्त कलेक्टर को दिए आवेदन में मांग की है कि उनके बेटों ने वादाखिलाफी की है, इसलिए उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाई जाए। बुजुर्ग महिला की दर्दभरी दास्तां और शारीरिक स्थिति को भांपते हुए अतिरिक्त कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लिया और तुरंत संबंधित एसडीएम को इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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