कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में हाईकोर्ट ने एक बार फिर बड़ा फैसला सुनाया है। अनसूटेबल और डिफिशिएंट पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। केवल सूटेबल पाए गए कॉलेजों के करीब 8000 छात्र ही परीक्षा में शामिल हो सकेंगे और उनके ही परिणाम जारी किए जाएंगे।

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यह फैसला लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है। याचिकाकर्ता एडवोकेट विशाल बघेल ने प्रदेश में 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद CBI ने पूरे मामले की जांच की। जांच में कुल 800 से ज्यादा नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज पैमाने पर खरे नहीं उतरे। मात्र 245 कॉलेज ही सूटेबल पाए गए।

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अनसूटेबल कॉलेजों के छात्रों के भविष्य को लेकर कोर्ट में लंबी बहस चली। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल मानकों पर खरे उतरने वाले कॉलेजों के छात्रों को ही परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी। इस फैसले से हजारों छात्रों के करियर पर असर पड़ा है, लेकिन कोर्ट का मानना है कि फर्जी कॉलेजों से निकले डिग्रीधारकों को समाज में नर्सिंग जैसी संवेदनशील सेवा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले की सुनवाई जारी है। हाईकोर्ट इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए CBI से लगातार अपडेट मांग रहा है।

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