वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति पर लगी रोक हटा दी है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कहा गया कि सिर्फ सीनियरिटी के आधार पर कोई अधिकारी ऊंचे पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। याचिका खारिज होने की स्थिति देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने केस वापस ले लिया।

क्या है मामला?
बिलासपुर में पदस्थ प्राचार्य राघवेंद्र गौरहा और कामेश्वर बैरागी ने अपने अधिवक्ता के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा कि बिलासपुर जिले में 100 से ज्यादा ऐसे प्राचार्य हैं, जो नियुक्त किए गए प्रभारी डीईओ से 18 साल या उससे अधिक सीनियर हैं। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने कुछ महीने पहले पदोन्नत हुए प्राचार्य (एलबी) रामेश्वर जायसवाल को प्रभारी डीईओ के पद पर नियुक्त कर दिया।
सीनियर अधिकारियों की सीआर लिखने पर भी उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि राज्य सरकार के सर्कुलर के मुताबिक, किसी जूनियर अधिकारी को अपने से सीनियर अधिकारियों के ऊपर पदस्थ नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब उसे अपने से सीनियर अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) लिखने की स्थिति में ला दिया जाए। इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डीईओ की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के ध्यान में लाया गया कि प्रभार देना एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। जब तक किसी नियम या कानून में यह अनिवार्य न हो कि सीनियर अधिकारी को ही प्रभार दिया जाएगा, तब तक केवल सीनियरिटी के आधार पर किसी पद का प्रभार पाने का कानूनी अधिकार नहीं बनता। इस आधार पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करनी चाही। इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार लिया।
कोर्ट के फैसले से नियुक्ति का रास्ता साफ
बता दें कि हाईकोर्ट ने गरियाबंद के प्रभारी डीईओ राजेश चंद्राकर की नियुक्ति पर भी कहा था कि जूनियर अधिकारी को प्रभारी डीईओ या बीईओ बनाना शासन का प्रशासनिक फैसला है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट सामान्य तौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगा। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने गरियाबंद में जूनियर अधिकारी को प्रभारी डीईओ नियुक्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसी संदर्भ में यह फैसला भी दिया गया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बिलासपुर डीईओ रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
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