चंडीगढ़ : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू मामले में बर्खास्त डीएसपी गुरशेर संधू की याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है।
सिंगल बेंच में हुई सुनवाई के दौरान संधू के वकील ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पहले सरकार को इस इंटरव्यू में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों के नाम उजागर करने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया और केवल जूनियर अधिकारी को निशाना बनाया गया।
संधू के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डबल बेंच ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी जूनियर अधिकारी को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए और वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता का खुलासा होना चाहिए। इसके बावजूद, सरकार ने उन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जो उस समय जिम्मेदारी में थे।
वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि जब लॉरेंस बिश्नोई सीआईए खरड़ में था, तब वह कभी भी संधू की कस्टडी में नहीं था, बल्कि वह एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) की कस्टडी में था।हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सभी दलीलों को सुनने के बाद आदेश दिया कि इस मामले में डिवीजन बेंच द्वारा जारी नोटिस और संबंधित केस की पूरी फाइल 30 जुलाई को कोर्ट में पेश की जाए।

गौरतलब है कि 3 जून को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए थे कि गुरशेर संधू से जुड़े सभी सबूत सीलबंद लिफाफे में पेश किए जाएं और यह भी स्पष्ट किया जाए कि जब बिश्नोई सीआईए खरड़ परिसर में था, तब उसकी सुरक्षा व्यवस्था किसके अधीन थी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 30 जुलाई को होगी।
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