वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की स्थायी बेंच नहीं होने पर छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम, बिलासपुर ने जनहित याचिका दायर कर गंभीर चिंता जताई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य शासन से इस संबंध में आवश्यक निर्देश लेकर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की ओर से अधिवक्ता बीपी राव, विकास बाजपेयी, अरविंद सिन्हा और पूजा सिन्हा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित कैट की प्रधान पीठ की सर्किट बेंच साल में पांच बार, प्रत्येक दो महीने में एक सप्ताह के लिए बिलासपुर में काम करती है। इसके कारण पक्षकारों को आवेदन जमा करने, त्रुटियां दूर कराने और अन्य प्रक्रियाओं के लिए जबलपुर जाना पड़ता है। इसके बाद मामलों की ऑनलाइन सुनवाई होती है, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।

अधिवक्ताओं ने बताया कि बिलासपुर में कैट भवन के लिए जमीन आवंटित हो चुकी है, लेकिन वर्तमान में सर्किट बेंच जिला उपभोक्ता फोरम के प्रथम तल पर स्थित एक छोटे कमरे में संचालित हो रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लिए स्थायी बेंच की आवश्यकता है, ताकि पक्षकारों को बार-बार जबलपुर न जाना पड़े।

केंद्र सरकार की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा और अधिवक्ता अन्नपूर्णा तिवारी ने पक्ष रखा। मिश्रा ने स्थायी बेंच की स्थापना के लिए उठाए गए कदमों और वर्तमान स्थिति की जानकारी देने के लिए सक्षम अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करने हेतु समय मांगा। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर और उप शासकीय अधिवक्ता अनुजा शर्मा उपस्थित हुए।

डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी का शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। वहीं राज्य शासन को छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच स्थापित करने के संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थायी बेंच की स्थापना बिलासपुर में किया जाना बेहतर होगा। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

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