हेमंत शर्मा, इंदौर। धार की बहुचर्चित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में आखिरकार इंतजार की घड़ी खत्म होने जा रही है। इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच शुक्रवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। करीब चार साल तक चली लंबी सुनवाई और कई दौर की बहस के बाद अब पूरे प्रदेश समेत देशभर की नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है। 12 मई 2026 को हुई अंतिम सुनवाई में हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें पूरी की थीं। इसके बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट में हिंदू पक्ष, मुस्लिम पक्ष, एएसआई, केंद्र सरकार और राज्य शासन की ओर से विस्तृत बहस की गई थी।
2022 में दायर हुई थी याचिका
इस पूरे विवाद को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने साल 2022 में इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना, धार्मिक अधिकार और ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर कई मांगें उठाई गई थीं। इसके बाद मामला लगातार हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए लगा रहा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई सुनवाई
भोजशाला विवाद लंबे समय से अदालतों में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में नियमित सुनवाई शुरू हुई थी। पिछले कुछ महीनों में लगातार सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक दस्तावेज, एएसआई रिपोर्ट और धार्मिक दावों को आधार बनाकर कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा।
देशभर में चर्चा का केंद्र बना भोजशाला विवाद
धार भोजशाला मामला लंबे समय से धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। यही वजह है कि इस मामले को लेकर देशभर में लगातार चर्चा होती रही है। अब चार साल लंबी सुनवाई के बाद आने वाला हाईकोर्ट का फैसला इस विवाद की दिशा तय कर सकता है। प्रशासन भी फैसले को देखते हुए पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

