रांची। झारखंड में JSSC CGL-2023 से जुड़ा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। राज्य सरकार द्वारा परीक्षा और इसके आधार पर हुई नियुक्तियां रद्द किए जाने के बाद हाईकोर्ट की दखल से 1340 अधिकारियों-कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। कार्मिक विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि इन कर्मियों से पूर्व की तरह काम लिया जाए।

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद कार्मिक विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, JSSC सचिव, प्रमंडलीय आयुक्तों और उपायुक्तों को पत्र भेजकर आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

सरकार के फैसले के बाद मचा था हड़कंप

17 अगस्त 2026 को राज्य कैबिनेट ने JSSC CGL-2023 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था। इसके अगले ही दिन कार्मिक विभाग ने परीक्षा के साथ-साथ इससे हुई नियुक्तियों को भी रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी।

इस फैसले से नियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों के सामने नौकरी पर संकट खड़ा हो गया। इसके बाद प्रभावित कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने लगाई सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक

28 अगस्त को हाईकोर्ट ने सरकार की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए प्रभावित कर्मियों को अपने पदों पर काम जारी रखने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कई विभागों में यह स्पष्टता नहीं थी कि इन कर्मचारियों से काम लिया जाए या नहीं।अब कार्मिक विभाग के ताजा आदेश ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। 1340 कर्मी अपने-अपने पदों पर पहले की तरह काम करते रहेंगे।

नियमित नियुक्ति खत्म करने से पहले प्राकृतिक न्याय जरूरी

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CGL-2023 के विज्ञापन संख्या 10/2023 को रद्द करने संबंधी सरकारी अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक जारी रखी। अदालत ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि किसी नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता।

अब 15 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाबी शपथ पत्र दाखिल कर CID जांच और अब तक हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा देने का निर्देश दिया है। प्रार्थियों को 14 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करना होगा।

मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर 12:15 बजे होगी। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अर्पण एक्का और कुमार अभिषेक ने पक्ष रखा।

क्या है पूरा मामला?

JSSC ने जनवरी 2024 में CGL परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप लगे और छात्रों ने आंदोलन किया। सरकार ने SIT गठित कर जांच शुरू कराई। इसके बाद जुलाई-अगस्त 2024 में परिणाम जारी हुआ और 1,932 अभ्यर्थियों का चयन कर विभिन्न विभागों में नियुक्ति दी गई।

करीब दो साल बाद 17 अगस्त 2026 को कैबिनेट ने परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया। इसके खिलाफ प्रभावित कर्मी हाईकोर्ट पहुंचे। अब अदालत के अंतरिम आदेश के बाद 1340 कर्मियों की नौकरी फिलहाल सुरक्षित है और वे अपने पदों पर काम जारी रखेंगे।