भुवनेश्वर। पवित्र बाहुड़ा यात्रा और रथयात्रा के उत्तरार्ध के सभी धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारू एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए लोकसेवा भवन में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में आगामी सभी नीतियों और उत्सवों के निर्विघ्न संपादन पर विस्तृत चर्चा हुई।

गुंडिचा यात्रा हादसों की समीक्षा और कड़े दिशा-निर्देश

बैठक में विशेष रूप से गुंडिचा यात्रा के दौरान हुई अप्रिय घटनाओं और व्यवस्थागत खामियों की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति किसी भी हाल में नहीं होनी चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

बाहुड़ा यात्रा, सुनाबेश, अधरपणा और नीलाद्रि बिजे जैसे महत्वपूर्ण अवसरों के दौरान भक्तों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया।

उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर

इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के उप-मुख्यमंत्री, कानून मंत्री, राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, पुलिस महानिदेशक (DGP), श्रीमंदिर मुख्य प्रशासक सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रशासनिक निर्देश

बैठक में प्रत्येक विभाग की तैयारियों का व्यक्तिगत रूप से जायजा लिया गया। सभी विभागों को आपस में बेहतर समन्वय स्थापित कर काम करने का निर्देश दिया गया है ताकि भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाहुड़ा यात्रा से लेकर नीलाद्रि बिजे तक के सभी अनुष्ठान पूर्ण सुरक्षा, शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हों। इसके लिए सरकारी स्तर पर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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