Technology Desk – Fake Social Media Ads : अगर आपके फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कभी ₹1 में देसी घी, महंगा स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच या कोई ब्रांडेड सामान खरीदने का विज्ञापन दिखाई दे, तो उस पर भरोसा करने से पहले एक बार जरूर सोचें। ऐसे ऑफर देखने में भले ही आकर्षक लगते हों, लेकिन इनके पीछे साइबर ठगों का बड़ा जाल छिपा हो सकता है। भारतीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) लोगों को ऐसे फर्जी विज्ञापनों से सावधान रहने की सलाह दे चुका है।

कैसे फंसाते हैं साइबर ठग?
ठग सबसे पहले सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापन दिखाते हैं जिनमें बेहद महंगे सामान को सिर्फ ₹1 या 90% तक की छूट पर बेचने का दावा किया जाता है। ऑफर देखकर जैसे ही कोई व्यक्ति विज्ञापन पर क्लिक करता है, उसे एक ऐसी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है जो देखने में बिल्कुल असली ऑनलाइन शॉपिंग साइट जैसी लगती है। यहीं से ठगी का खेल शुरू होता है।
₹1 का पेमेंट बन जाता है सबसे बड़ा जाल
फर्जी वेबसाइट पर यूजर से सिर्फ ₹1 का भुगतान करने के लिए कहा जाता है। भुगतान के दौरान कार्ड नंबर, CVV, एक्सपायरी डेट और कई मामलों में OTP जैसी जानकारी भी मांगी जाती है। जैसे ही यह जानकारी ठगों के हाथ लगती है, वे बैंक खाते या कार्ड का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। कई मामलों में तुरंत बड़ी रकम निकालने के बजाय छोटी-छोटी रकम काटी जाती है, ताकि लंबे समय तक धोखाधड़ी जारी रखी जा सके।
इन संकेतों से पहचानें फर्जी ऑफर
महंगे प्रोडक्ट का अविश्वसनीय रूप से सस्ता दाम।
जल्द खरीदने का दबाव बनाने वाले विज्ञापन।
नई या अनजान वेबसाइट पर पेमेंट करने का आग्रह।
वेबसाइट के नाम या लिंक में गलत स्पेलिंग।
आधिकारिक ब्रांड की बजाय संदिग्ध पेज या अकाउंट से विज्ञापन।
ठगी से बचने के आसान तरीके
ऑनलाइन खरीदारी करते समय कुछ छोटी सावधानियां आपको बड़े नुकसान से बचा सकती हैं।
बहुत सस्ते या अविश्वसनीय ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
हमेशा ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप से ही खरीदारी करें।
किसी भी वेबसाइट का पता (URL) ध्यान से देखें और सुरक्षित कनेक्शन (HTTPS) की पुष्टि करें।
सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले अनजान विज्ञापनों के लिंक पर क्लिक करने से बचें।
अनजान वेबसाइट पर कार्ड की पूरी जानकारी साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें।
अगर ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
यदि गलती से आपने फर्जी वेबसाइट पर भुगतान कर दिया है या कार्ड की जानकारी साझा कर दी है, तो बिना देर किए कार्रवाई करें।
सबसे पहले अपने बैंक से संपर्क कर कार्ड को ब्लॉक कराएं।
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
बैंक खाते और कार्ड के सभी ट्रांजेक्शन पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
लालच से ज्यादा जरूरी है सतर्कता
साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए सोशल मीडिया विज्ञापनों का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। याद रखें, अगर कोई ऑफर सच होने से भी ज्यादा अच्छा लग रहा है, तो उसके फर्जी होने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा हो सकती है। ऑनलाइन खरीदारी करते समय थोड़ी सतर्कता आपकी मेहनत की कमाई और निजी जानकारी दोनों को सुरक्षित रख सकती है।


