रवि रायकवार, दतिया। महिला एवं बाल विकास विभाग में उस समय अखाड़ा बन गया, जब आरटीआई से शुरू हुआ मामला “कॉलर कांड” तक पहुंच गया। एक तरफ आरटीआई एक्टिविस्ट एवं अधिवक्ता शंभू गोस्वामी, दूसरी तरफ जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद उपाध्याय थे।

मामला आरटीआई में जानकारी का

दरअसल आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगने पर विभाग ने 83 हजार पन्नों का हवाला देकर 1.66 लाख रुपए जमा करने का पत्र थमा दिया। शायद उम्मीद थी कि इतनी रकम सुनकर मामला ठंडा पड़ जाएगा, लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब शंभू गोस्वामी सचमुच नकदी लेकर दफ्तर पहुंच गए। इसके बाद दफ्तर में जो हुआ, उसने सरकारी मर्यादा को भी पसीना ला दिया। विभाग ने नकद लेने से इनकार किया, बहस बढ़ी और फिर डीपीओ अरविंद उपाध्याय खुद अपना कॉलर आगे कर बोले- ‘पकड़ो मेरा कॉलर… पकड़ो, थप्पड़ मारो’ उधर, अधिवक्ता गोस्वामी भी पीछे नहीं हटे और डीपीओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते नजर आए।

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चालान से जमा करवाना होता

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और लोग कह रहे हैं- दतिया में फाइलें कम, लाइव शो ज्यादा चल रहा है। महिला एवं बाल विकास अधिकारी अरविंद उपाध्याय का कहना है कि 10 सालों की जानकारी आरटीआई के माध्यम से मांगी गई थी जिसे हम देने को तैयार है जिस राशि को सम्बंधित ऑफिस में लेकर आये उसको चालान के माध्यम से जमा करवानी होती है लेकिन संबंधित ने विभाग में आकर हंगामा किया।

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