हिसार के नागरिक अस्पताल में एक महिला के शव को चूहों द्वारा कुतरे जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने हांसी में सड़क जाम कर भारी हंगामा किया।

हांसी। हिसार नागरिक अस्पताल से एक बेहद शर्मनाक और विचलित करने वाला मामला सामने आया है, जहां मॉर्च्युरी में रखे एक महिला के शव को चूहों ने कुतर दिया। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक महिला की हांसी में सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे गंभीर हालत में हिसार रेफर किया गया, जहां अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए हिसार सिविल अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया था। रविवार सुबह जब परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेने पहुंचे, तो माथे पर चूहों के काटने के निशान देख उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

परिजनों का आक्रोश और सड़क जाम

शव की इस दुर्दशा को देखकर परिजन पूरी तरह भड़क गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित परिजनों ने हांसी की तोशाम चुंगी पर एम्बुलेंस खड़ी कर मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिसके कारण वहां वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान परिवार का कहना था कि अस्पताल की मॉर्च्युरी में शव की गरिमा और सुरक्षा बनाए रखने में प्रशासन बुरी तरह विफल रहा है, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।

पुलिस और प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी विनोद शंकर और शहर थाना प्रभारी सुखजीत सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी परिजनों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया और काफी मशक्कत के बाद करीब आधे घंटे में जाम को खुलवाकर यातायात बहाल कराया। थाना प्रभारी सुखजीत सिंह ने पुष्टि की कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है। अस्पताल प्रशासन अब इस चूक के लिए सफाई देने में जुटा है, जबकि पीड़ित परिवार ने अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।