चंडीगढ़। हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) को लेकर विधानसभा में विपक्ष के सवालों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। मुख्यमंत्री ने पुराने सरकारी आंकड़े सदन में रखते हुए कहा कि संविदा कर्मचारियों की व्यवस्था मौजूदा सरकार की देन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासन के महज 9 वर्षों में कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की संयुक्त श्रेणी में करीब 71 हजार की बढ़ोतरी हुई थी।
विधानसभा में सोमवार को HKRNL से संबंधित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था को खत्म कर रोजगार की प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया है। उनके अनुसार पहले कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर वेतन और पीएफ तक कई मामलों में ठेकेदारों पर निर्भरता रहती थी। कई कर्मचारियों को निर्धारित वेतन से कम भुगतान किए जाने और 12 महीने के बजाय 11 महीने का वेतन दिए जाने जैसी शिकायतें भी सामने आती थीं।
1967 से मौजूद थी संविदा व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने सदन में वर्ष 1967 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 31 मार्च 1967 को हरियाणा सरकार में कुल 97,385 कर्मचारी थे। इनमें 11,397 कर्मचारी कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट आधार पर कार्यरत थे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 तक नियमित श्रेणियों के कर्मचारियों की संख्या 2,55,319 हो गई, जबकि उक्त संयुक्त श्रेणी में कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 84,642 पहुंच गई। यानी 1967 की तुलना में इस श्रेणी में 73,245 कर्मचारियों की वृद्धि हुई।
सैनी ने कहा कि वर्ष 2014 में अनुबंध आधारित कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई थी। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि संविदात्मक रोजगार व्यवस्था HKRNL बनने के बाद शुरू हुई।
कांग्रेस के 9 साल के आंकड़े रखे सामने
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1967 से 2005 के बीच 38 वर्षों में कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की संयुक्त संख्या 11,397 से बढ़कर 38,949 हुई। इसके बाद 2005 से 2014 के बीच कांग्रेस शासन के नौ वर्षों में यह संख्या करीब 1.10 लाख तक पहुंच गई।
सैनी के मुताबिक 38 वर्षों में जहां इस श्रेणी में 27,552 कर्मचारी बढ़े, वहीं कांग्रेस के नौ साल में करीब 71 हजार की वृद्धि हुई। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि संविदा व्यवस्था इतनी बड़ी समस्या है तो कांग्रेस के शासनकाल में इसमें इतनी तेज वृद्धि क्यों हुई।
ठेकेदारों की भूमिका खत्म करने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल ठेकेदारों को हटाना नहीं था, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया को बदलना था जिसमें रोजगार के लिए युवाओं को बिचौलियों या ठेकेदारों पर निर्भर रहना पड़ता था।
HKRNL के माध्यम से युवाओं को पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा दी गई है और निर्धारित पात्रता व योग्यता के आधार पर तैनाती की जाती है। इसके लिए ‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ लागू की गई है।
उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था में वेतन, ईपीएफ और ईएसआई से संबंधित शिकायतें भी आती थीं। सरकार ने अब इन व्यवस्थाओं को संस्थागत निगरानी से जोड़ने का काम किया है।
समान काम के लिए वेतन व्यवस्था में एकरूपता
सैनी ने कहा कि अलग-अलग ठेकेदारों के जरिए कर्मचारियों को भुगतान होने से वेतन में भी असमानता रहती थी। HKRNL के गठन के बाद 19 जनवरी 2022 से समान वेतन दरों की व्यवस्था लागू की गई।
मुख्यमंत्री के अनुसार 9 अप्रैल 2026 से लागू श्रम दरों में अकुशल कर्मचारी के लिए 15,220.71 रुपये, अर्धकुशल के लिए 16,780.74 रुपये और कुशल कर्मचारी के लिए 18,500.81 रुपये प्रतिमाह की दर निर्धारित है।
ट्रांसफर और अनुकम्पा नियुक्ति का भी दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि HKRNL के जरिए संविदा कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण और डी.डी.ओ. शिफ्टिंग की व्यवस्थित व्यवस्था बनाई गई है। अब तक ऐसे 1,316 मामलों को मंजूरी दी जा चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि सेवा के दौरान संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रित को रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। अब तक 306 पात्र लोगों को अनुकम्पा आधार पर रोजगार दिया जा चुका है। परिवार को तीन लाख रुपये की अनुकम्पा सहायता या अनुकम्पा नियुक्ति में से एक विकल्प चुनने की सुविधा भी दी गई है।
ईपीएफ-ईएसआई पर सरकार ने बताए आंकड़े
सैनी ने दावा किया कि HKRNL के माध्यम से कर्मचारियों के ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि का भुगतान व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक इन मदों में बड़ी राशि जमा की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक करीब 2,100 करोड़ रुपये ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा किए जा चुके हैं। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय कितने कर्मचारियों का ईपीएफ काटा गया और उनके खातों में जमा कराया गया, इसका रिकॉर्ड भी सामने रखा जाना चाहिए।
ठेकेदार कमीशन में बचत का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में ठेकेदारों को कुल बिल का करीब दो प्रतिशत कमीशन दिया जाता था, जबकि HKRNL महज 0.5 प्रतिशत निगम शुल्क लेता है।
उन्होंने दावा किया कि निगम की स्थापना के बाद संबंधित संस्थाओं से करीब 81.44 करोड़ रुपये निगम शुल्क के रूप में मिले हैं। यदि पुरानी व्यवस्था के हिसाब से दो प्रतिशत कमीशन दिया जाता तो करीब 160 करोड़ रुपये खर्च होते। इस हिसाब से सरकार को लगभग 78.56 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
महिला कर्मचारियों और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश सहित अन्य छुट्टियों का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा चिकित्सा और आकस्मिक अवकाश की व्यवस्था भी लागू है।
उन्होंने कहा कि 21 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाले पात्र संविदा कर्मचारियों को ईएसआईसी के जरिए स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं, जबकि इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों को चिरायु योजना के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने वर्षों पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था को समाप्त कर रोजगार प्रणाली को नियम, योग्यता, पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अधूरे आंकड़ों के आधार पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार ने सदन में पूरी तस्वीर आंकड़ों के साथ रखने का काम किया है।
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