भुवनेश्वर: ओडिशा का मशहूर मणिकापटना दही जो पुरी ज़िले की एक पारंपरिक डिश है, ज्योग्राफ़िकल इंडिकेशन (GI) स्टेटस पाने की कगार पर है। यह एक ऐसी पहचान है जो इसकी खास पहचान को बचाएगी और इसकी मार्केट वैल्यू को बढ़ाएगी।
ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) ड्राफ़्ट एप्लीकेशन को फ़ाइनल कर रही है, वाइस-चांसलर प्रोफ़ेसर प्रभात कुमार राउल ने कन्फ़र्म किया है कि सारा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक डेटा इकट्ठा कर लिया गया है।
स्थानीय तौर पर मणिकापटना दही के नाम से मशहूर इस दही का गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। कहानियों के मुताबिक इसकी शुरुआत भगवान जगन्नाथ और ग्वालिन मनिका गौडुनी की पौराणिक कहानी से हुई है, जिन्होंने ऐतिहासिक कांची यात्रा के दौरान दही चढ़ाया था। इस जुड़ाव ने दही को श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं से जुड़ी भक्ति का प्रतीक बना दिया है।

इसका खास स्वाद कृष्णप्रसाद और ब्रह्मगिरी इलाकों में पाली जाने वाली देसी भैंसों के दूध से आता है। इसका नतीजा एक गाढ़ा, क्रीमी दही होता है जिसमें खट्टा स्वाद और प्रोबायोटिक फ़ायदे होते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि GI टैग से पुराने डेयरी के तरीकों को बचाया जा सकेगा, गांव के प्रोड्यूसर्स को ताकत मिलेगी और ओडिशा की खाने की विरासत को बढ़ावा मिलेगा। राज्य के पास पहले से ही 27 GI टैग हैं, जिनमें ओडिशा रसगुल्ला, पट्टचित्र और कोणार्क पत्थर की नक्काशी शामिल हैं, जो इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और खेती की विरासत को दिखाते हैं।
- हाईवे पर नकाबपोश बदमाशों का तांडव: ट्रक ड्राइवर को बंधक बनाकर चाकू की नोक पर 200 लीटर डीजल और मोबाइल लूटा
- गणेश विसर्जन कब होगा: बप्पा को विदाई देने की सही विधि क्या है?
- Jamshedpur Murder Case: निखार सबलोक हत्याकांड में पुलिस का बड़ा एक्शन, मुख्य साजिशकर्ता राघव के दफ्तर पर छापा, खंगाले दस्तावेज
- ‘राहुल गांधी फूहड़ राजनीति करने वाले नेता’, जमुई मामले पर संजय सरावगी का पलटवार
- बिजली बिल प्रति यूनिट 30 से 45 पैसे महंगी, जुलाई-अगस्त का बकाया भी नए बिल में जुड़ेगा


