एक सरल लेकिन गहन सत्य है रूप और स्वरूप का भेद “Don’t judge a book by its cover” इस प्रसिद्ध इंग्लिश saying का अर्थ है “किसी को देखकर न क़रें उसका आंकलन ”। बाहरी रूप, पहनावे या व्यवहार के कुछ क्षणों के आधार पर किसी भी व्यक्ति के चरित्र का निर्णय करना एक बहुत बड़ी भूल है। किसी भी इंसान की वास्तविक पहचान उसके कर्म, विचार और संस्कारों से होती है उसके बाहरी स्वरूप से तो कतई नही।

हिंदू पौराणिक कथाओं में भी यही बात बार-बार सामने आती है कि व्यक्ति की भावना और कर्म ही उसे महान बनाते हैं। साधारण सी दिखने वाली वनवासी शबरी की भक्ति और प्रेम ने उसे प्रभु राम के हृदय में विशेष स्थान दिलाया था। इंसान बाहरी परिस्थितियों से नही अपने आंतरिक गुणों से ही श्रेष्ठ बनते हैं।

सोशल मीडिया और दिखावे वाली आज की दुनिया में लोग बाहरी छवि को ही सब कुछ मान बैठे हैं। स्मरण रहे आपको सच्चा रिश्ता, सच्चा सम्मान और सच्ची सफलता आपका आंतरिक गुण ही दिलाता है। बाहरी रूप हमें भ्रमित कर सकता है उस भ्रम से यथा सम्भव बचने का प्रयास करना चाहिए अन्यथा सुंदर स्वरूप के लोग हाथ से जा सकते हैं। सच्चे और अच्छे लोगों को पहचानने से बड़ी चूक हो सकती है। धैर्य और समझदारी स किसी भी व्यक्ति को जानने और समझने में अपना समय दें। बाहरी आवरण नहीं जब हम दूसरों को उनके कर्म और व्यवहार से पहचानने लगेंगे तब हमारे संबंध स्थाई और मजबूत होंगे और हमारा जीवन भी संतुलित और सार्थक होगा।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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