हरियाणा के 645 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। विकास एवं पंचायत विभाग के तत्कालीन अधीक्षक को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पंचकूला। 645 करोड़ रुपये के बहुचर्चित आईडीएफसी बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के तत्कालीन अधीक्षक नरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने नरेश कुमार को 10 जून को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA- मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून) के तहत हिरासत में लिया। मामले में सरकारी धन के बड़े स्तर पर गबन और मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन का नेटवर्क) की जांच तेज कर दी गई है।
ईडी जांच में खुलासा हुआ है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़-पंचकूला के दो निजी स्कूलों के IDFC FIRST Bank में संचालित खातों से करीब 645 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का कथित गबन किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी विक्रम वाधवा बताया जा रहा है, जिसने रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी धन के दुरुपयोग की साजिश रची।
ईडी के मुताबिक, नरेश कुमार को कथित तौर पर ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ नामक शेल कंपनी के जरिए सीधे धनराशि प्राप्त हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि वह केवल पैसे लेने तक सीमित नहीं था, बल्कि फंड डायवर्जन (धन को दूसरी जगह भेजना), लेयरिंग (लेन-देन छिपाने की प्रक्रिया) और अपराध से अर्जित रकम को छिपाने की पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। अब ईडी इस घोटाले में शामिल अन्य अधिकारियों, बैंक कर्मियों और वित्तीय नेटवर्क की भी गहन जांच कर रही है।

