कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। जिला कोर्ट ने फायरिंग मामले को फर्जी बताए जाने के मामले पर पुलिस को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि बिना जांच और कोर्ट की अनुमति के ईडी सीबीआई भी FIR दर्ज नहीं कर सकती, तो पुलिस में इतनी ताकत कहां से आई? जज ने कोर्ट रूम में कानून की किताब रखकर पुलिस अधिकारियों से तीन सवाल भी किये जिनके वह जवाब नहीं दे पाए। कोर्ट ने ग्वालियर एसपी की कार्यप्रणाली को भी संतोषजनक नहीं माना और टिप्पणी करते हुए कहा कि SP को कोर्ट में आने से परहेज है तो हमें भी कानून आता है। कोर्ट के निर्देश पर ग्वालियर पुलिस अधीक्षक को आज कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान उपस्थित होना होगा।
4 फरवरी 2026 को गांव में गोलीकांड
दरअसल यह मामला ग्वालियर जिले के बनहेरी गांव का है जहां के सरपंच विक्रम सिंह रावत की पड़ाव क्षेत्र में हत्या कर दी गई थी। इस मामले की कड़ी में 4 फरवरी 2026 को गांव में ही एक गोली कांड हुआ था जिसमें फरियादी अजब सिंह रावत को गोली लगी थी जिसका आरोप दूसरे पक्ष पर लगाया था ग्वालियर पुलिस ने जांच की तो मामला फर्जी निकला था ,पुलिस ने अजब सिंह और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उन्होंने जिला न्यायालय में जमानत आवेदन लगाया इसमें तर्क दिया गया की घटना को फर्जी बताते हुए फरियादी और गवाह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कोर्ट से इजाजत तक नहीं ली और ना ही FIR की।
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पुलिस अधीक्षक कोर्ट रूम में कितने बजे हाजिर होते
यहीं से कोर्ट में पूरा मामला फंस गया। ऐसे में कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित हुए जिस पर जज ने सख्त लहजे में सवाल किया कि आपने बिना पूरी जांच किये और मजिस्ट्रेट की अनुमति लिए बिना फरियादियों पर FIR कैसे दर्ज कर दी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि ग्वालियर में इस तरह के दर्ज सभी मामलों की फाइल खोली जाएगी और उनकी जांच की जाएगी। बहरहाल आज देखना होगा कि ग्वालियर पुलिस अधीक्षक कोर्ट रूम में कितने बजे हाजिर होते हैं, और न्यायालय इस मामले में आगे किस तरह की सुनवाई करता है।

