Lifestyle Desk – बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. मानसून के दौरान नमी और गंदगी के कारण बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं. इसका सीधा असर खानपान पर पड़ता है. यही वजह है कि इस मौसम में अस्पतालों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है. सड़क किनारे मिलने वाले जूस, कटे हुए फल, लंबे समय तक बाहर रखा खाना या दूषित पानी का सेवन इस समस्या का प्रमुख कारण बन सकता है.

हालांकि, पेट दर्द होना हमेशा फूड पॉइजनिंग का संकेत नहीं होता. कई बार यह सामान्य अपच या गैस की वजह से भी हो सकता है. ऐसे में दोनों के बीच का अंतर समझना जरूरी है, ताकि समय रहते सही इलाज कराया जा सके. आइए जानते हैं विस्तार से.

कब समझें कि यह फूड पॉइजनिंग हो सकती है?

अगर खाना खाने के कुछ घंटों के भीतर या 1-2 दिन के अंदर अचानक पेट में तेज दर्द, बार-बार उल्टी, लगातार दस्त, मतली, बुखार या कमजोरी महसूस होने लगे, तो यह फूड पॉइजनिंग का संकेत हो सकता है. कुछ लोगों को पेट में ऐंठन, सिरदर्द और शरीर में दर्द की शिकायत भी हो सकती है.

फूड पॉइजनिंग में सबसे बड़ा खतरा शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी यानी डिहाइड्रेशन का होता है. यदि बार-बार उल्टी और दस्त हो रहे हैं, मुंह सूख रहा है, पेशाब कम आ रही है, चक्कर आ रहे हैं या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

सामान्य अपच और फूड पॉइजनिंग में क्या अंतर है?

सामान्य अपच में आमतौर पर पेट भारी लगना, गैस बनना, हल्का दर्द या खट्टी डकार जैसी समस्याएं होती हैं, जो कुछ समय बाद या हल्की दवा से ठीक हो जाती हैं. वहीं फूड पॉइजनिंग में लक्षण अधिक गंभीर होते हैं और उल्टी-दस्त बार-बार हो सकते हैं. कई मामलों में बुखार भी आ सकता है और मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है.

पेट दर्द होने पर क्या न करें?

पेट दर्द या दस्त शुरू होते ही बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या पेन किलर लेना सही नहीं है. हर फूड पॉइजनिंग में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती और गलत दवा लेने से संक्रमण बढ़ सकता है या अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं. इसके अलावा, दस्त रोकने वाली दवाएं भी बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि कई बार शरीर संक्रमण को बाहर निकालने की प्रक्रिया में होता है.

फूड पॉइजनिंग होने पर क्या करें?

  1. यदि हल्के लक्षण हैं तो सबसे पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का सेवन करें, ताकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो.
  2. नारियल पानी, सादा भोजन, खिचड़ी और दही जैसे हल्के खाद्य पदार्थ लेने से भी राहत मिल सकती है. मसालेदार, तला-भुना और बाहर का खाना खाने से बचें.
  3. अगर उल्टी-दस्त लगातार हो रहे हों, तेज बुखार हो, मल में खून दिखाई दे, मरीज बहुत सुस्त हो जाए या छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिला में ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कर तरल पदार्थ चढ़ाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है.

बचाव ही सबसे बेहतर उपाय

मानसून में हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाएं. लंबे समय तक बाहर रखा खाना, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, सड़क किनारे मिलने वाले जूस और कटे हुए फलों से बचें. केवल साफ और सुरक्षित पानी पिएं तथा खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं.

बारिश के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी आपको फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्या से बचा सकती है. अगर पेट दर्द के साथ उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण नजर आएं, तो इसे सामान्य अपच समझकर नजरअंदाज करने की बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है.