Dharm Desk – सावन का पावन महीना चल रहा है और शिव भक्त इन दिनों नियमित रूप से भोलेनाथ की आराधना में लीन है। सुबह होते ही मंदिरों में शिवलिंग पर जल चढ़ाने, बेल पत्र अर्पित करने और भगवान भोलेनाथ का ध्यान करने का सिलसिला शुरू हो जाता है। सावन में भगवान शिव की पूजा केवल सोमवार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे महीने शिव भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार महादेव प्रसन्न करने पूजा करते हैं, हालांकि सावन के सोमवार को शिव आराधना का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस पूरे महीने यदि आप भी भगवान शिव की पूजा कर रहे है तो अभिषेक की सही विधि और पूजन सामग्री का महत्व जानना आपके लिए उपयोगी हो सकता है।

सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा

सावन में शिवलिंग पर अभिषेक की शुरुआत शुद्ध जल से की जाती है। शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल अर्पित करना चाहिए। जल अर्पित करते समय मन में भगवान शिव का स्मरण और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना करना जरूरी है।

बेलपत्र के बिना अधूरी है शिवजी की पूजा

भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र का विशेष स्थान है। सावन के दौरान शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला स्वच्छ बेलपत्र अर्पित करें। बेल पत्र चढ़ाते समय भक्त भगवान शिव का ध्यान करे और सुख, शांति तथा परिवार के मंगल की प्रार्थना करे। बेलपत्र को शिव आराधना में भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

दूध, दही और शहद से अभिषेक

सावन में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और पूजा की परंपरा के अनुसार ल, शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक भी करते हैं। दूध, दही, घी, शहद और जल के पंचामृत से अभिषेक के बाद दोबारा स्वच्छ जल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। शहद को मधुरता और चंदन को शीतलता से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इनका प्रयोग भी शिव पूजा में करें।

धतूरा और फूल करें अर्पित

भगवान शिव को धतूरा अर्पित करने की परंपरा सावन में विशेष रूप से देखने को मिलती है। इसके साथ सफेद फूल जैसे मोगरा और चमेली भी अर्पित किया जा सकता हैं। पूजा सामग्री अर्पित करते समय सबसे महत्वपूर्ण भाव श्रद्धा और समर्पण बहुत जरूरी है साथ ही पूरे अभिषेक के दौरान ओम नमः शिवाय का निरंतर जब भी बहुत फल देने वाला होता है। महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं।

मौसमी फलों को इस तरह करें अर्पित

सावन में भगवान शिव को विभिन्न फल अर्पित करने की परंपरा है। भक्त अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार, फल चढ़ाकर महादेव से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। शिव पूजा में दिखावे की बजाय सरलता और भक्ति को अधिक महत्व देना चाहिए।

सावन में रोज पूजा, सोमवार को विशेष भक्ति

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का विशेष अवसर है। इसलिए महादेव की पूजा केवल सावन सोमवार तक सीमित नहीं है। भक्त सावन के प्रत्येक दिन श्रद्धा के अनुसार जलाभिषेक, बेल पत्र अर्पण और शिव मंत्रों का जाप कर सकते हैं। वहीं सावन सोमवार को मंदिरों में शिवभक्तों की भीड़ और पूजा-पाठ का उत्साह और अधिक दिखाई देता है।