Dharm Desk – कुंडली में ग्रहों की चाल का असर हमारी जिंदगी पर गहराई से पड़ता है. इन्हीं प्रभावों को संतुलित करने के लिए ज्योतिषी रत्नधारण करने की सलाह देते है. लोग रत्न पहन तो लेते हैं. लेकिन इसे कब उतारना चाहिए, कैसे संभालना चाहिए. इसे लेकर अक्सर कन्फ्यूजन बना रहता है.

रत्नशास्त्र बताता है कि किसी भी रत्न वाली अंगूठी को बार-बार उतारना सही नहीं है… पुखराज, मोती, नीलम, माणिक्य और हीरा जैसे सभी रत्नों पर ये नियम लागू होता है. जब किसी रत्न को ग्रहों के आधार पर धारण किया जाता है, तो उसका असर धीरे-धीरे शरीर पर बनने लगता है. रत्न और त्वचा के बीच ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है, लेकिन इसे बार-बार उतारने से यह प्रवाह टूट सकता है, जिससे प्रभाव कमजोर पड़ जाता है.
वैज्ञानिक दृष्टि से भी बार-बार अंगूठी निकालना ठीक नहीं है. इससे रत्न गिरकर टूट सकता है या स्किन पर रगड़ का असर पड़ सकता है. रत्न शरीर की एनर्जी के साथ काम करता है, इसलिए इसे बार-बार हटाने से इसका प्रभाव कम हो सकता है. यदि रत्न को थोड़ी देर के लिए साफ करने हेतु उतारा जाए तो ठीक है, लेकिन एक घंटे से अधिक समय तक उतारने पर उसे दोबारा शुद्धिकरण करके ही पहनना चाहिए. खंडित, फटा या बदरंग रत्न तुरंत बदल देना चाहिए.
विरोधाभासी रत्नों को एक साथ पहनने से नुकसान
किसी से लिया हुआ, छीना हुआ या रास्ते में मिला रत्न नहीं पहनना चाहिए. नीलम, हीरा जैसे रत्नों को पहले कुछ दिन परीक्षण के बाद ही धारण करना उचित माना गया है. रत्न उचित धातु में ही पहनना चाहिए और उसे विधिपूर्वक मंत्रों के साथ धारण करने से ही पूरा लाभ मिलता हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि रत्न पहनते समय आस्था बनाए रखें. तभी इसका प्रभाव सही रूप में प्राप्त होता है.
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