Dharm Desk – आज के समय में बच्चों का व्यवहार और उनकी बदलती आदतें अधिकांश अभिभावक के लिए चिंता का एक बड़ा विषय बन चुका हैं। हर अभिभावक चाहता है कि उनका बच्चा शांत आज्ञाकारी और सही रास्ते पर चलने वाला हो।बदलती जीवनशैली और आसपास के वातावरण के कारण बहुत बार बच्चे बात-बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा करने लगते हैं। हर छोटी चीज के लिए जिद अड़ाने लगते हैं और उनका स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक स्थिति तब बनती है जब बच्चा धीरे-धीरे गतल संगत की ओर आकर्षित होने लगता है और घर वालों की बातों को पूरी तरह से अनदेखा करने लगता है।

जब डांट-फटकार प्यार से समझाने या सख्त नियम बनाने के बाद भी बच्चे के व्यवहार में कोई सुधार नहीं दिखाई देता तब पारंपरिक उपाय बहुत मददगार साबित होते हैं। भारतीय सनातन परंपरा में भगवान शंकर की आराधना को मन की शांति और विचारों की शुद्धि के लिए सबसे उत्तम माना गया है। ऐसे में शिवलिंग से जुड़ा एक बहुत आसान सरल और असरदार उपाय बच्चे के उग्र स्वभाव को शांत करने में कारगर साबित होता है।महादेव की पूजा से दूर होगी मानसिक अशांति बच्चों के अंदर हद से ज्यादा गुस्सा या जिद्दी पन उनके मानसिक तनाव या आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का परिणाम हो सकता है। भगवान शंकर को शांति सौम्यता और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। जब किसी बच्चे का मन भटक रहा हो या उसका स्वभाव आक्रामक हो रहा हो तो भोलेनाथ पर विशेष सामग्रियों को चढ़ाने से उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सामग्री और इसे तैयार करने की विधि
इस उपाय को करने के लिए किसी जटिल पूजा सामग्री की जरूरत नहीं होती। इसे बहुत आसानी से घर पर उपलब्ध दो मुख्य सामग्रियों से पूरा किया जा सकता है।
- लाल चंदन – लाल चंदन को मन की शीतलता शांति और एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है। यह मानसिक संताप और गुस्से को शांत करने में परवा होता है।
- शहद – शहद मिठास सकारात्मकता और सौम्यता का प्रतीक है। यह वाणी और व्यवहार में मधुरता लाने का कार्य करता है।
पहले थोड़ा सा शुद्ध लाल चंदन का पाउडर लें और उसमें जरूरत के अनुसार शहद मिलाकर एक गाढ़ा घोल तैयार कर लें। इस तैयार किए गए घोल पर अपने बच्चे की हथेली या उंगलियों का स्पर्श कराएं। यदि बच्चा मंदिर जाने के लिए तैयार न हो या मना करे तो परेशान होने की जरूरत नहीं है सिर्फ घर पर ही घोल से उसका हाथ स्पर्श करवा लेना परयाप्त होता है। बच्चे का स्पर्श कराने के पश्चात इस घोल को किसी भी पास के शंकर मंदिर में ले जाएं। मंदिर पहुंचकर पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से इस लाल चंदन और शहद के घोल को शिवलिंग पर अर्पित करें।
कुछ ही दिनों में देखने लगेगी असर
शास्त्रों के अनुसार जब यह उपाय पूरी निष्ठा के साथ किया जाता है। तो इसके दूरगामी और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। लाल चंदन की शीतलता बच्चे के भीतर पनप रहे अकारण गुस्से और मानसिक अशांति को खत्म करती है। वहीं शहद का असर बच्चे के स्वभाव में जिद की जगह सौम्यता और समझदारी लेकर आता है।


