Technology Desk – IIT Madras Cooling Technology : स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती गर्मी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। अब इस समस्या का समाधान भारतीय वैज्ञानिकों की नई तकनीक से मिल सकता है। आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने ऐसी आधुनिक कूलिंग तकनीक विकसित की है, जो बिना किसी मोटर या पंप के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का तापमान नियंत्रित रखने में सक्षम है। यह तकनीक भविष्य में छोटे गैजेट्स से लेकर बड़े औद्योगिक सिस्टम तक के प्रदर्शन को बेहतर बना सकती है।

क्या है यह नई तकनीक?

शोधकर्ताओं ने फ्लैट प्लेट पल्सेटिंग हीट पाइप (Flat Plate Pulsating Heat Pipe) का नया डिजाइन तैयार किया है। इसमें बेहद पतली नलिकाओं के अंदर विशेष प्रकार का तरल भरा जाता है। जब किसी हिस्से का तापमान बढ़ता है, तो यह तरल भाप में बदलकर ठंडे हिस्से तक पहुंच जाता है। वहां दोबारा तरल बनकर वापस लौट आता है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और बिना अतिरिक्त बिजली खर्च किए डिवाइस को ठंडा बनाए रखती है।

नए डिजाइन से बढ़ी कूलिंग क्षमता

आईआईटी मद्रास की टीम ने इस तकनीक में पारंपरिक डिजाइन से अलग तरीका अपनाया है। पहले ऐसे सिस्टम में गर्मी लेने और छोड़ने वाले हिस्से एक ही सतह पर होते थे, लेकिन नए डिजाइन में इन्हें प्लेट की विपरीत सतहों पर लगाया गया है। इस बदलाव से सिस्टम ज्यादा कॉम्पैक्ट बन गया है और इसे पतले स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में आसानी से लगाया जा सकता है।

एल्युमिनियम ने तांबे को भी छोड़ा पीछे

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने अलग-अलग डिजाइन और मटेरियल पर परीक्षण किए। नतीजों में एल्युमिनियम ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। इस खास डिजाइन में एल्युमिनियम का तापीय प्रतिरोध तांबे की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम पाया गया। इसका मतलब है कि यह गर्मी को अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकता है। साथ ही एल्युमिनियम हल्का और सस्ता होने के कारण भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की लागत और वजन दोनों कम किए जा सकते हैं।

छोटे बदलाव से मिली और बेहतर परफॉर्मेंस

शोधकर्ताओं ने हीट पाइप की अंदरूनी संरचना में भी सुधार किया, जिससे तरल का प्रवाह पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर हो गया। इस बदलाव के बाद कूलिंग क्षमता में लगभग 16 प्रतिशत तक अतिरिक्त सुधार दर्ज किया गया। इससे डिवाइस लंबे समय तक बिना ओवरहीट हुए बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

किन क्षेत्रों में मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो इसका असर कई उद्योगों में दिखाई देगा। डेटा सेंटर कम ऊर्जा खर्च में ज्यादा कुशलता से काम कर सकेंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी और पावर सिस्टम की ओवरहीटिंग कम होगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और उम्र बढ़ सकती है। वहीं रक्षा क्षेत्र में रडार, एवियोनिक्स और अन्य संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अधिक भरोसेमंद तरीके से काम कर सकेंगे। इसके अलावा भविष्य के स्मार्टफोन, लैपटॉप और दूसरे कॉम्पैक्ट गैजेट भी कम गर्म होंगे और बेहतर परफॉर्मेंस देंगे।

भारत के लिए क्यों है यह अहम?

यह तकनीक सिर्फ एक नई रिसर्च नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग और इनोवेशन की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यदि इसे व्यावसायिक स्तर पर अपनाया जाता है, तो इससे ऊर्जा की बचत होगी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लाइफ बढ़ेगी और भारत को एडवांस थर्मल मैनेजमेंट तकनीकों के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है।